रांची में वकीलों का महामंथन: संविधान ही आम जनमानस की सुरक्षा का सबसे विश्वसनीय दस्तावेज

नवीन कुमार
रांची: ‘इंडियन एसोसिएशन ऑफ लॉयर्स’ (IAL) झारखंड चैप्टर और हॉफमैन लॉ एसोसिएट्स के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को रांची स्थित XISS सभागार में ‘भारतीय संविधान की प्रस्तावना और नागरिक’ विषय पर एक राज्य स्तरीय संगोष्ठी आयोजित की गई। इस कार्यक्रम में राज्य भर के वरिष्ठ अधिवक्ताओं, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और कानूनविदों ने हिस्सा लिया।
संविधान: सुरक्षा का आधार
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता के रूप में झारखंड के एडवोकेट जनरल रोहितेश्य राय ने कहा कि संविधान न केवल कानून की एक किताब है, बल्कि यह आम आदमी के अधिकारों का सबसे मजबूत रक्षक है। उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में निहित हमारे अधिकार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने देश की स्वतंत्रता के समय थे।
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झारखंड हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एस.एन. पाठक ने संविधान की तुलना सीमा पर तैनात जवानों से करते हुए कहा, “आज के एआई और साइबर सुरक्षा के दौर में भी हमारा संविधान आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए पूरी तरह सक्षम है। संविधान की प्रस्तावना कभी पुरानी नहीं हो सकती, यह केवल एक गलत परिकल्पना है।”
रांची डिक्लेरेशन 2026′ और अधिवक्ताओं की सुरक्षा
कार्यक्रम के दौरान झारखंड स्टेट बार काउंसिल के सदस्य और IAL के सचिव एडवोकेट एके रसीदी ने ‘रांची डिक्लेरेशन 2026’ की घोषणा करते हुए अधिवक्ताओं के लिए ‘एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट’ को अविलंब लागू करने की पुरजोर मांग की। उन्होंने कहा कि न्याय प्रणाली की सुरक्षा के लिए वकीलों का निडर होना आवश्यक है। साथ ही, उन्होंने जूनियर वकीलों के लिए आर्थिक सुरक्षा और सीनियर वकीलों के लिए पेंशन व्यवस्था की भी वकालत की।
न्याय तक पहुंच और सामाजिक दायित्व
सेवानिवृत्त न्यायाधीश रत्नाकर भेंगरा ने कहा कि संविधान समाज के हर वर्ग के लिए सुरक्षा की गारंटी है और इसे किसी भी प्रकार की चुनौती देना न्यायसंगत नहीं है।
कार्यक्रम में उपस्थित राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री हफीजुल हसन ने कहा कि राज्य सरकार वकीलों के कल्याण के प्रति संवेदनशील है और स्वास्थ्य बीमा जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से उनके उत्थान के लिए लगातार काम कर रही है।
रांची जिला बार एसोसिएशन के महासचिव संजय विद्राही ने वकालत पेशे को समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुँचाने का माध्यम बताते हुए कहा कि हमें न्याय, समता और बंधुत्व के दीप को निरंतर जलाए रखने की आवश्यकता है।
राज्य भर से जुडे़ अधिवक्ता
इस सेमिनार में हजारीबाग, बोकारो, धनबाद, जमशेदपुर, मेदनीनगर, रामगढ़ और गिरिडीह सहित राज्य के विभिन्न जिलों से आए अधिवक्ताओं ने भाग लिया। कार्यक्रम के दौरान नए निर्वाचित सदस्यों का सम्मान भी किया गया।
इस संगोष्ठी का मुख्य उद्देश्य नागरिक अधिकारों, संवैधानिक मूल्यों की रक्षा और अधिवक्ताओं की कार्यदशाओं में सुधार पर एक सार्थक विमर्श करना था, जिसने न्यायपालिका और आम जनमानस के बीच सेतु का कार्य किया।
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