धनबाद की राजनीति के ‘मन्नान भाई’ सादगी और संघर्षपूर्ण सफर का अंत

डेस्क : झारखंड की राजनीति में एक लंबा अध्याय समाप्त हो गया। धनबाद के पूर्व मंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता मन्नान मल्लिक का निधन हो गया है। अपने पीछे वे एक लंबा राजनीतिक सफर और जनसेवा की यादें छोड़ गए हैं। मन्नान मल्लिक का जाना धनबाद कांग्रेस और उनके समर्थकों के लिए एक अपूरणीय क्षति है।

एक लंबा और संघर्षपूर्ण सफर
मन्नान मल्लिक केवल एक नेता नहीं, बल्कि धनबाद के उस दौर के गवाह थे जब यहां की राजनीति को ट्रेड यूनियन की मजबूती से समझा जाता था। उनका राजनीतिक सफर बेहद प्रभावशाली रहा:
राजनीतिक शुरुआत: राजनीति में आने से पहले ही उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। वे तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री अब्दुल गफूर के निजी सचिव (PS) रहे, जहाँ से उन्हें प्रशासन और राजनीति की बारीकियों को समझने का अनुभव मिला।
ट्रेड यूनियन के साथी: उन्होंने कोयलांचल के मजदूरों की आवाज बुलंद की। वे राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर संघ (RCMS) और राष्ट्रीय कोलियरी मजदूर यूनियन के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में लंबे समय तक सक्रिय रहे। उन्होंने कोयला खदानों में काम करने वाले मजदूरों के हक की लड़ाई में हमेशा आगे बढ़कर नेतृत्व किया।
कांग्रेस संगठन के स्तंभ: धनबाद जिला कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संगठन को जमीन से जोड़ा। कठिन समय में भी वे पार्टी के प्रति समर्पित रहे और कार्यकर्ताओं के लिए हमेशा एक मार्गदर्शक की भूमिका निभाई।
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक को दी श्रद्धांजलि, परिजनों को बंधाया ढांढस

मंत्री के रूप में भूमिका
वर्ष 2009 में धनबाद विधानसभा सीट से जीत हासिल करने के बाद वे पहली बार विधायक बने। हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार में मंत्री के रूप में उन्होंने जनहित के कई महत्वपूर्ण कार्यों को अंजाम दिया। वे अपने सरल व्यवहार और लोगों के बीच रहने की शैली के कारण अक्सर ‘मन्नान भाई’ के नाम से संबोधित किए जाते थे।
हालिया कानूनी विवाद और चर्चा
मन्नान मल्लिक का अंतिम समय कानूनी उलझनों के बीच बीता। हाल ही में 10 जुलाई को धनबाद जिला एवं सत्र न्यायालय ने उन्हें 2011 के चर्चित मटकुरिया गोलीकांड मामले में दोषी ठहराते हुए 3 साल की सजा सुनाई थी। हालांकि, गंभीर धाराओं में बरी होने और तुरंत जमानत मिल जाने के बाद उनके समर्थकों ने राहत की सांस ली थी, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
एक युग का अंत
मन्नान मल्लिक का निधन उन लोगों के लिए एक बड़ा झटका है जो उन्हें एक जुझारू और जमीनी नेता के तौर पर देखते थे। वे धनबाद की उस पुरानी राजनीति की कड़ी थे, जहां निजी संबंधों और वैचारिक प्रतिबद्धता का गहरा महत्व था। उनके निधन पर धनबाद के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है।
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