RMC approved two building plans for the same plot within a three-month interval; the ward was changed too!

रांची नगर निगम कारनामा ,एक ही प्लॉट पर तीन माह के अंतराल में दो नक्शे पास, वार्ड भी बदला! दीपक प्रकाश ने उठाये सवाल

RMC approved two building plans for the same plot within a three-month interval; the ward was changed too!

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रांची: झारखंड की राजधानी रांची के नगर निगम प्रशासन पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रांची नगर निगम की टाउन प्लानिंग शाखा में चल रही कथित ‘सिंडिकेट’ की कार्यप्रणाली ने शहर के सुनियोजित विकास और प्रशासनिक पारदर्शिता को कठघरे में खड़ा कर दिया है। ताजा मामला कडरू स्थित न्यू एजी कॉलोनी का है, आरोप है की RMC ने एक ही भूमि और होल्डिंग नंबर पर महज तीन महीने के अंतराल में दो अलग-अलग नक्शे स्वीकृत कर दिए गए, और इस प्रक्रिया में भूमि के वार्ड तक को बदल दिया गया। इस बाबत पूर्व राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश ने मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन को ACB जांच के लिए पत्र लिखा है।

​क्या है पूरा मामला?

​दीपक प्रकाश के लिखे खत में आरोप है की कडरू के न्यू एजी कॉलोनी में एक ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का नक्शा [नक्शा नंबर-215] इसी साल मार्च महीने में स्वीकृत किया गया था। निगम के रिकॉर्ड में इस भूमि को वार्ड संख्या-25 के अंतर्गत दिखाया गया था।

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​हैरानी की बात तब सामने आई जब जून महीने में उसी बिल्डर के दूसरे ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट का नक्शा पास किया गया। इस बार निगम के टाउन प्लानिंग विभाग ने खेल करते हुए उसी भूमि और होल्डिंग नंबर का वार्ड बदलकर ’26’ कर दिया। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा जानबूझकर किया गया ताकि किसी खास इंजीनियर या अधिकारी के अधिकार क्षेत्र (वार्ड) में काम को सेट किया जा सके, जिससे नक्शा पास कराने में कोई अड़चन न आए।

​’सिंडिकेट’ का खेल: नियमों की हो रही अनदेखी

​सूत्रों के अनुसार, रांची नगर निगम के टाउन प्लानिंग सेक्शन में एक संगठित सिंडिकेट सक्रिय है। बिल्डर्स अपने मनमाफिक इंजीनियरों से नक्शा पास कराने के लिए वार्ड बदलने से लेकर लैंड यूज तक बदलने के खेल में लगे हैं।

आवासीय बनाम कॉमर्शियल: आरोप है कि आवासीय जमीन पर कॉमर्शियल बिल्डिंग के नक्शे धड़ल्ले से पास किए जा रहे हैं।

दस्तावेजों का बोझ: आम नागरिकों और छोटे घर बनाने वालों को अनावश्यक पुराने दस्तावेजों और मालिकाना हक के प्रमाण के लिए चक्कर कटवाए जा रहे हैं, जबकि बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए नियमों को दरकिनार किया जा रहा है।

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इस गंभीर अनियमितता को लेकर पूर्व राज्यसभा सांसद और भाजपा के वरिष्ठ नेता दीपक प्रकाश ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से कराने की मांग की है। उन्होंने लिखा है कडरू स्थित ‘न्यू एजी कॉलोनी’ में ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट के नक्शों की स्वीकृति में खेल किया गया है। मार्च महीने में उक्त प्रोजेक्ट का नक्शा वार्ड-25 के तहत पास किया गया, लेकिन जून महीने में उसी बिल्डर के दूसरे प्रोजेक्ट के लिए उसी होल्डिंग का वार्ड बदलकर 26 कर दिया गया।

पूर्व सांसद दीपक प्रकाश का आरोप

मुख्यमंत्री को भेजे अपने पत्र (Ref. No. रा. 74/748/2026) में दीपक प्रकाश ने इसे केवल एक प्रशासनिक चूक नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘सिंडिकेट’ का काम बताया है। उन्होंने पत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर जांच की मांग की है:

वार्ड बदलने का आधार: एक ही होल्डिंग और प्लॉट नंबर पर अलग-अलग वार्ड कैसे दर्शाए गए? इसके पीछे किन अधिकारियों की मिलीभगत है?

नियमों की अनदेखी: नक्शा स्वीकृति के समय भूमि के दस्तावेज, रजिस्ट्री और स्थल सत्यापन की प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया?

भ्रष्टाचार का अंदेशा: क्या इस पूरे प्रकरण में बिल्डरों को लाभ पहुंचाने के लिए आवासीय भूमि को कॉमर्शियल दिखाने या नियमों में ढील देने का खेल खेला गया है?

‘सिंडिकेट’ का साया

दीपक प्रकाश ने अपनी शिकायत में इस बात पर जोर दिया है कि रांची नगर निगम के टाउन प्लानिंग सेक्शन में एक सिंडिकेट हावी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई पहली घटना नहीं है, बल्कि लंबे समय से इस तरह के षड्यंत्र चल रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि वे स्वयं इस क्षेत्र के मतदाता भी हैं, इसलिए इस मामले की गंभीरता और बढ़ जाती है।

क्या कहते हैं अधिकारी?

इस पूरे मामले पर नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने सफाई देते हुए कहा है कि नक्शा पास करने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। यदि वार्ड बदलने जैसी गड़बड़ी हुई है, तो यह एलटीपी (Licensed Technical Person) स्तर की त्रुटि हो सकती है। उन्होंने इस पूरे मामले की जांच कराने का आश्वासन दिया है।

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