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जज उत्तम आनंद हत्याकांड: हाईकोर्ट ने बरकरार रखी उम्रकैद, कहा- यह हादसा नहीं, सुनियोजित हत्या थी; CCTV, फॉरेंसिक और वैज्ञानिक जांच बने सबसे बड़े सबूत

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रांची : देशभर में चर्चित धनबाद के अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (ADJ) उत्तम आनंद हत्याकांड में झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए सीबीआई कोर्ट द्वारा सुनाई गई दोषसिद्धि और सजा को बरकरार रखा है। हाईकोर्ट ने अपने विस्तृत निर्णय में कहा कि उपलब्ध CCTV फुटेज, फॉरेंसिक साक्ष्य, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, वैज्ञानिक पुनर्निर्माण (Crime Scene Reconstruction) और परिस्थितिजन्य साक्ष्योंसे यह स्पष्ट होता है कि यह सामान्य सड़क दुर्घटना नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया हमला था।

हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने सीबीआई कोर्ट, धनबाद द्वारा 28 जुलाई 2022 को सुनाए गए फैसले को सही ठहराते हुए आरोपी **लखन कुमार वर्मा और राहुल कुमार वर्मा की दोषसिद्धि को बरकरार रखा। दोनों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/34 और 201/34के तहत दोषी ठहराया गया है। उन्हें आजीवन कारावास (बिना किसी रिमिशन या कम्यूटेशन के अंतिम सांस तक) तथा जुर्माने की सजा दी गई थी।

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क्या था पूरा मामला?

28 जुलाई 2021 की सुबह करीब 5 बजे धनबाद के तत्कालीन जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-8 उत्तम आनंद मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। इसी दौरान एक ऑटो रिक्शा ने उन्हें पीछे से टक्कर मार दी। गंभीर रूप से घायल न्यायाधीश को अस्पताल ले जाया गया, जहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

शुरुआत में मामला सड़क दुर्घटना जैसा लगा, लेकिन घटना का CCTV वीडियो सामने आने के बाद मामला पूरी तरह बदल गया। झारखंड सरकार ने जांच पहले एसआईटी को और बाद में इसकी गंभीरता को देखते हुए सीबीआई को सौंप दी।

हाईकोर्ट ने किन साक्ष्यों को सबसे महत्वपूर्ण माना?

1. डॉक्टरों की गवाही ने बताया चोट कितनी गंभीर थी

SNMMCH के डॉक्टरों ने अदालत को बताया कि:

न्यायाधीश गंभीर सिर की चोट के साथ अस्पताल लाए गए थे।
दोनों कान और नाक से लगातार खून बह रहा था।
उन्हें तुरंत वेंटिलेटर पर रखा गया।
तमाम प्रयासों के बावजूद सुबह 9 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया।

पोस्टमार्टम बोर्ड ने पाया कि:

सिर की दोनों तरफ गंभीर फ्रैक्चर थे।
सबड्यूरल ब्लीडिंग और दिमाग में गंभीर चोट थी।
सभी चोटें मृत्यु से पहले लगी थीं।
मृत्यु का कारण सिर की गंभीर चोट था।

पोस्टमार्टम बोर्ड ने यह भी कहा कि सिर की एक गंभीर चोट भी सामान्य परिस्थितियों में मृत्यु के लिए पर्याप्त थी।

2. फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने बताया कैसे हुई टक्कर

मुंबई और सीएफएसएल के विशेषज्ञों ने घटनास्थल का निरीक्षण, CCTV विश्लेषण, ऑटो रिक्शा की जांच और घटना का वैज्ञानिक पुनर्निर्माण किया।

विशेषज्ञों की रिपोर्ट के अनुसार:

ऑटो चालक पूरे समय वाहन पर पूर्ण नियंत्रण में था।
उसने न ब्रेक लगाया और न ही न्यायाधीश को बचाने की कोशिश की।
ऑटो लगभग 20 मीटर तक अपनी सामान्य दिशा छोड़कर न्यायाधीश की ओर बढ़ा।
करीब 20 डिग्री के कोण से टक्कर मारी।
टक्कर के बाद ऑटो फिर अपनी मूल दिशा में लौट गया।

कोर्ट के फैसले के अनुसार विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि:

बाईं ओर सिर की चोट ऑटो के किनारे से लगी।
कुछ चोटें जमीन पर गिरने से आईं।
ऑटो की गति लगभग 23 किमी प्रति घंटा थी।
सिर की चोटें मृत्यु के लिए पर्याप्त थीं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि विशेषज्ञों ने स्पष्ट राय दी कि यह घटना दुर्घटना नहीं बल्कि जानबूझकर किया गया हमला प्रतीत होती है।

3. CCTV फुटेज बना सबसे बड़ा इलेक्ट्रॉनिक सबूत

सीबीआई ने विभिन्न सरकारी कैमरों और पेट्रोल पंप के CCTV फुटेज अदालत में पेश किए।
इन फुटेज के विश्लेषण में सामने आया कि:

ऑटो न्यायाधीश की गतिविधियों के आसपास लगातार दिखाई देता है।
घटना के समय ऑटो में दो व्यक्ति मौजूद थे।
बाद में पेट्रोल पंप पहुंचने पर ऑटो में केवल एक व्यक्ति दिखाई देता है।
विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि ऑटो चालक पूरी तरह सामान्य मानसिक स्थिति में था और उसका वाहन पूरी तरह नियंत्रण में था।
फॉरेंसिक क्राइम सीन प्रोफाइलिंग रिपोर्ट में कहा गया कि उपलब्ध CCTV फुटेज के आधार पर घटना **पूर्व नियोजित और जानबूझकर की गई प्रतीत होती है।

4. ऑटो में कोई तकनीकी खराबी नहीं थी

मोटर वाहन निरीक्षक ने अदालत को बताया कि:

ऑटो के ब्रेक और स्टीयरिंग पूरी तरह सही थे।
वाहन में ऐसी कोई तकनीकी खराबी नहीं थी जिससे दुर्घटना हो सकती थी।
केवल बाईं ओर का इंडिकेटर हाल में टूटा हुआ पाया गया, जो टक्कर से जुड़ा माना गया।

5. वैज्ञानिक और डिजिटल साक्ष्यों ने मजबूत किया अभियोजन का पक्ष

अदालत के समक्ष:
घटनास्थल का 3D पुनर्निर्माण प्रस्तुत किया गया।
खून, मिट्टी और अन्य नमूनों की फॉरेंसिक जांच कराई गई।
CCTV फुटेज को भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65B के तहत प्रमाणित किया गया।
कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी पेश किए गए।

हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में उपलब्ध चिकित्सीय, फॉरेंसिक, वैज्ञानिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों पर विस्तार से चर्चा करते हुए माना कि यह मामला साधारण सड़क दुर्घटना का नहीं है। अदालत ने कहा कि घटनाक्रम, ऑटो की दिशा, चालक का व्यवहार, चोटों की प्रकृति और वैज्ञानिक रिपोर्टें अभियोजन के उस पक्ष का समर्थन करती हैं कि यह एक **जानबूझकर किया गया हमला था।

क्या रही सजा?

हाईकोर्ट ने सीबीआई कोर्ट की सजा को बरकरार रखते हुए दोनों दोषियों की सजा में कोई हस्तक्षेप नहीं किया। इसके अनुसार:

धारा 302/34 IPC:अंतिम सांस तक बिना किसी रिमिशन या कम्यूटेशन के आजीवन कारावास तथा 20,000 रूपये जुर्माना।
धारा 201/34 IPC:सात वर्ष का कठोर कारावास तथा 10,000 रुपया जुर्माना।
दोनों सजाएं साथ-साथ (Concurrent) चलेंगी।

क्यों महत्वपूर्ण है यह फैसला?

उत्तम आनंद हत्याकांड देश की न्यायपालिका से जुड़े सबसे चर्चित मामलों में से एक रहा। एक कार्यरत न्यायिक अधिकारी की मॉर्निंग वॉक के दौरान हुई मौत ने पूरे देश में न्यायाधीशों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे।

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