शंभू कुमार सिंह सिमडेगा: पोक्सो अधिनियम से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सिमडेगा की विशेष अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष न्यायाधीश (पोक्सो), सिमडेगा की अदालत ने शुक्रवार को सुनाया। मामला रेंगारीह थाना कांड संख्या-05/2023 (दिनांक 13 मई 2023) से संबंधित है। न्यायालय ने आरोपी जितेन्द्र प्रधान (पिता- टानु प्रधान, निवासी देवबहार, थाना रेंगारीह, जिला सिमडेगा) को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) तथा पोक्सो अधिनियम की धारा 4/6/8 के तहत दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कारावास एवं 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। सिमडेगा पुलिस ने मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच करते हुए सभी आवश्यक साक्ष्य और गवाहों को समय पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। इसके आधार पर अभियोजन पक्ष न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखने में सफल रहा। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक निशि कच्छप ने प्रभावी पैरवी की, जबकि अनुसंधान का जिम्मा पुलिस अवर निरीक्षक उपेन्द्र कुमार ने संभाला। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह फैसला पीड़ितों को न्याय दिलाने और महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश है।

पोक्सो मामले में दोषी को 20 साल की सजा, 40 हजार रुपये जुर्माना

Convict in POCSO case sentenced to 20 years in prison, fined ₹40,000.
Convict in POCSO case sentenced to 20 years in prison, fined ₹40,000.

शंभू कुमार सिंह

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सिमडेगा: पोक्सो अधिनियम से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में सिमडेगा की विशेष अदालत ने आरोपी को 20 वर्ष के कठोर कारावास और 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। यह फैसला प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह विशेष न्यायाधीश (पोक्सो), सिमडेगा की अदालत ने शुक्रवार को सुनाया।

मामला रेंगारीह थाना कांड संख्या-05/2023 (दिनांक 13 मई 2023) से संबंधित है। न्यायालय ने आरोपी जितेन्द्र प्रधान (पिता- टानु प्रधान, निवासी देवबहार, थाना रेंगारीह, जिला सिमडेगा) को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(3) तथा पोक्सो अधिनियम की धारा 4/6/8 के तहत दोषी करार देते हुए 20 वर्ष के कारावास एवं 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।

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सिमडेगा पुलिस ने मामले की वैज्ञानिक तरीके से जांच करते हुए सभी आवश्यक साक्ष्य और गवाहों को समय पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। इसके आधार पर अभियोजन पक्ष न्यायालय में अपना पक्ष मजबूती से रखने में सफल रहा।

मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक निशि कच्छप ने प्रभावी पैरवी की, जबकि अनुसंधान का जिम्मा पुलिस अवर निरीक्षक उपेन्द्र कुमार ने संभाला।

पुलिस अधिकारियों ने बताया कि यह फैसला पीड़ितों को न्याय दिलाने और महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कड़ा संदेश है।

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