पुल नहीं तो खटिया ही सहारा: सिमडेगा में शव को कंधों पर उठाकर नाला पार करने को मजबूर हुए ग्रामीण
बानो प्रखंड के टोनिया कर्राडमर गांव में एंबुलेंस नहीं पहुंच सकी, बरसों से पुल की मांग कर रहे ग्रामीणों का छलका दर्द
नरेश शर्मा / सिमडेगा
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बानो (सिमडेगा)। झारखंड में ग्रामीण क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं की हकीकत एक बार फिर सामने आई है। सिमडेगा जिले के बानो प्रखंड के टोनिया कर्राडमर गांव में शनिवार को ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने विकास के दावों पर सवाल खड़े कर दिए। पांगुर नाला पर पुल नहीं होने के कारण गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाई। नतीजतन, ग्रामीणों को एक मृतक के शव को खटिया पर रखकर कई लोगों के कंधों के सहारे नाला पार कराना पड़ा।

जानकारी के अनुसार, गांव निवासी सुनील कडुलना की मौत के बाद पुलिस की प्रक्रिया पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जाना था। लेकिन बरसात के कारण पांगुर नाला उफान पर था और पुल के अभाव में एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। मजबूरी में ग्रामीणों ने खटिया को ही अस्थायी स्ट्रेचर बनाया और शव को कंधों पर उठाकर नाला पार कराया। दूसरी ओर पहले से खड़ी एंबुलेंस में शव को रखकर अस्पताल के लिए रवाना किया गया।

यह पहली बार नहीं है जब इस गांव के लोगों को ऐसी परेशानी झेलनी पड़ी हो। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बारिश में पांगुर नाला गांव का संपर्क बाहरी दुनिया से लगभग काट देता है। बीमार मरीज हों, गर्भवती महिलाएं या बुजुर्ग, सभी को अस्पताल पहुंचाने के लिए इसी तरह खटिया का सहारा लेना पड़ता है।

ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के समक्ष पुल निर्माण की मांग उठाई गई, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है। उनका कहना है कि यदि समय रहते पुल का निर्माण हो जाता, तो ऐसी अपमानजनक और पीड़ादायक परिस्थितियों से लोगों को नहीं गुजरना पड़ता।

















