Pregnant woman loses life due to lack of road; body brought back on a cot.

सड़क नहीं होने से गई गर्भवती महिला की जान, खटिया पर लाया गया शव: साहिबगंज के पीराचक गांव से सामने आई अमानवीय तस्वीर

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Pregnant woman loses life due to lack of road; body brought back on a cot.
साहिबगंज (झारखंड): विकास के तमाम दावों के बीच झारखंड के साहिबगंज जिले से एक बार फिर व्यवस्था को शर्मसार कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। राजमहल प्रखंड अंतर्गत तेतुलिया पंचायत के पीराचक गांव में पक्की सड़क सुविधा के अभाव के कारण समय पर इलाज न मिलने से एक गर्भवती महिला की मौत हो गई। इलाज के बाद जब परिजन शव लेकर गांव लौटे, तब भी उन्हें कीचड़ भरे खेतों और दुर्गम रास्तों से शव को खटिया के सहारे ढोकर लाना पड़ा।

खटिया पर एंबुलेंस तक पहुँचाया, भागलपुर में तोड़ा दम

मृतका की पहचान पीराचक निवासी मोनू कुमार राय की पत्नी सपना कुमारी के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, गर्भावस्था के दौरान सपना कुमारी की तबीयत अचानक बहुत बिगड़ गई। गांव तक पक्की सड़क न होने के कारण कोई भी वाहन या एंबुलेंस गांव के भीतर नहीं आ सकती थी। ऐसे में ग्रामीणों और परिजनों ने उन्हें खटिया पर लिटाया और कीचड़ व खेतों के रास्ते कई किलोमीटर पैदल चलकर रामचौकी गांव पहुंचे।
रामचौकी से एंबुलेंस के जरिए उन्हें बेहतर इलाज के लिए भागलपुर (बिहार) ले जाया गया। हालांकि, तब तक काफी देर हो चुकी थी और इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया।

शव लाने में भी सड़क बनी सबसे बड़ी बाधा

मौत के बाद परिजनों की मुसीबतें खत्म नहीं हुईं। भागलपुर से शव लेकर आ रही एंबुलेंस सड़क न होने के कारण रामचौकी गांव में ही रुक गई। इसके बाद एक बार फिर परिजनों और ग्रामीणों को मृतका के शव को खटिया पर रखकर कीचड़ भरे रास्तों से होते हुए गांव तक पैदल लाना पड़ा। बाद में अंतिम संस्कार के लिए शव को राजमहल ले जाया गया।

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15 दिनों के भीतर एक ही परिवार पर टूटा दूसरा पहाड़
पीड़ित मोनू कुमार राय ने रोते हुए अपना दर्द बयां किया कि यह पहली बार नहीं है जब उनके परिवार को इस तरह का दंश झेलना पड़ा है।

“महज 15 दिन पहले मेरी मां की भी बीमारी से मौत हुई थी। उस समय भी सड़क नहीं होने के कारण उन्हें खटिया पर लादकर अस्पताल ले जाना पड़ा था और मृत्यु के बाद शव को इसी तरह गांव वापस लाना पड़ा था। 15 दिनों में मैंने सड़क न होने की वजह से अपने परिवार के दो सदस्यों को खो दिया।” — मोनू कुमार राय (मृतका के पति)

ग्रामीणों का आक्रोश: जिला प्रशासन से पक्की सड़क की मांग

गांव में हुई इस घटना के बाद से ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीण गौतम कुमार राय, अंजलि कुमारी राय, रेखा देवी, सूरज राय और संजय राय समेत अन्य लोगों ने बताया कि:

आजादी के इतने वर्षों बाद भी पीराचक गांव तक एक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है।
प्रसव (डिलीवरी), गंभीर बीमारी या किसी भी इमरजेंसी में एंबुलेंस केवल रामचौकी गांव तक ही आ पाती है।
ग्रामीण मरीजों और मृतकों के शवों को खटिया पर ढोने के लिए मजबूर हैं।

ग्रामीणों ने साहिबगंज जिला प्रशासन और राज्य सरकार से गुहार लगाई है कि पीराचक गांव तक जल्द से जल्द पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी अन्य परिवार को इस तरह की प्रशासनिक उपेक्षा और अमानवीय पीड़ा का सामना न करना पड़े।

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