चाईबासा : खनन क्षेत्र नोवामुंडी की तस्वीर: मरीज को 3 किमी खटिया पर ढोकर ले गए ग्रामीण, सरकार पर बरसे बड़कुंवर गागराई

अश्वनी पाठक | चाईबासा
पश्चिमी सिंहभूम के नोवामुंडी प्रखंड से सामने आया एक वीडियो इलाके में बुनियादी सुविधाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। वीडियो में ग्रामीण एक बीमार व्यक्ति को खटिया पर कंधे से उठाकर ले जाते दिखाई दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि यह वीडियो 7 सितंबर का है। मरीज की पहचान नोवामुंडी प्रखंड के बोकना गांव के तिरिलपी टोला निवासी मणकी सिद्धू के रूप में हुई है।
ग्रामीणों के मुताबिक तिरिलपी टोला तक पक्की सड़क नहीं होने और बारिश के दौरान रास्ते में बनी छोटी पुलिया के पानी में डूब जाने के कारण गांव का संपर्क प्रभावित हो जाता है। गंभीर मरीजों को भी अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रामीणों को करीब तीन किलोमीटर तक खटिया पर ढोकर ले जाना पड़ता है। इसके बाद किसी वाहन की मदद से मरीज को अस्पताल पहुंचाया जाता है।
बताया गया कि मणकी सिद्धू की तबीयत बिगड़ने पर ग्रामीण उन्हें करीब तीन किलोमीटर तक खटिया पर लेकर गए। इसके बाद वाहन से उन्हें नोवामुंडी के अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उन्हें चाईबासा रेफर कर दिया। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण वे मरीज को चाईबासा नहीं ले जा सके। इलाज का खर्च जुटाने में असमर्थ परिवार 10 सितंबर को मणकी सिद्धू को वापस गांव ले आया।

खनन से करोड़ों का राजस्व, फिर भी ग्रामीणों को सड़क नहीं
मामले को लेकर रविवार को पूर्व मंत्री और पूर्व भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष बड़कुंवर गागराई ने अपने कार्यालय में प्रेस वार्ता की। उन्होंने मरीज को खटिया पर ढोकर अस्पताल ले जाने की घटना को बेहद गंभीर और निंदनीय बताया।
गागराई ने कहा कि नोवामुंडी देश-दुनिया में बड़े खनन क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। क्षेत्र में टाटा और सेल जैसी कंपनियां खनन गतिविधियों से जुड़ी हैं। इसके बावजूद खनन प्रभावित इलाकों के ग्रामीणों को सड़क, पुल और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि एक तरफ विकास और खनन की बड़ी-बड़ी बातें होती हैं, लेकिन दूसरी तरफ ग्रामीण बारिश के दौरान पानी में चलने और गंभीर मरीजों को खटिया पर अस्पताल पहुंचाने के लिए मजबूर हैं। यह स्थिति सरकार के विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को सामने लाती है।
अस्पताल और 108 एंबुलेंस पर भी सवाल
पूर्व मंत्री ने नोवामुंडी और चाईबासा समेत जिले के सरकारी अस्पतालों की स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने डॉक्टरों की कमी और मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिलने का आरोप लगाया।
उन्होंने 108 एंबुलेंस सेवा की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जरूरत के समय ग्रामीणों को एंबुलेंस उपलब्ध नहीं हो पाती। कई एंबुलेंस खराब स्थिति में पड़ी होने का भी उन्होंने आरोप लगाया।
DMFT और CSR फंड आखिर किसके लिए?
गागराई ने खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए उपलब्ध जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) और कंपनियों के CSR फंड के इस्तेमाल पर भी सवाल उठाया।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2015 से DMFT के जरिए खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास और प्रभावित आबादी को सुविधाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इसके अलावा खनन कंपनियों को CSR के तहत भी प्रभावित क्षेत्रों में सामाजिक विकास के कार्य करने होते हैं।
ऐसे में तिरिलपी टोला में आज भी मरीज को खटिया पर तीन किलोमीटर तक ले जाने की स्थिति को लेकर यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि DMFT और CSR के जरिए होने वाले विकास कार्यों का वास्तविक लाभ ग्रामीणों तक कितना पहुंचा है।
सड़क-पुल की मांग, आंदोलन की चेतावनी
बड़कुंवर गागराई ने प्रशासन से तिरिलपी टोला तक बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने, नदी पर स्थायी पुल या उपयुक्त पुलिया बनाने और स्वास्थ्य एवं एंबुलेंस व्यवस्था में सुधार की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने जल्द मामले में संज्ञान नहीं लिया तो भाजपा आंदोलन करेगी। जरूरत पड़ने पर मामले को लोकसभा, राज्यसभा और सर्वोच्च न्यायालय तक ले जाने की बात भी उन्होंने कही।

















