JPSC-JSSC में बड़े सुधार की पहल: बंधु तिर्की ने मुख्यमंत्री को सौंपे 21 सूत्रीय सुझाव, भर्ती व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर

रांची। झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री बंधु तिर्की ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की भर्ती प्रक्रिया में व्यापक सुधार के लिए 21 सूत्रीय सुझाव सौंपे हैं। उन्होंने कहा कि हाल के वर्षों में भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं और विलंब के कारण युवाओं का भर्ती प्रणाली से विश्वास कमजोर हुआ है। ऐसे में केवल व्यक्तियों के बदलाव से नहीं, बल्कि संस्थागत सुधारों से ही व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाया जा सकता है।


मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में बंधु तिर्की ने कहा है कि परीक्षाओं और चयन प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता, कठोर जवाबदेही और समयबद्ध भर्ती सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने सुझाव दिया कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की तर्ज पर झारखंड स्टेट टेस्टिंग एजेंसी (JSTA) का गठन किया जाए, जबकि JPSC अपनी संवैधानिक भूमिका तक सीमित रहे। नई एजेंसी परीक्षा आयोजन, प्रश्नपत्र सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और परीक्षा केंद्रों के संचालन जैसे कार्यों की जिम्मेदारी संभाले।


उन्होंने परीक्षा अपराधों की जांच के लिए CID के अंतर्गत विशेष परीक्षा अपराध अन्वेषण प्रकोष्ठ बनाने, विशेष न्यायालय गठित करने तथा प्रश्नपत्र लीक, डमी अभ्यर्थी, साइबर अपराध और परीक्षा माफिया के खिलाफ त्वरित कार्रवाई की भी सिफारिश की है।

बंधु तिर्की ने JPSC की कार्य संचालन नियमावली में संशोधन कर आयोग में सामूहिक निर्णय प्रणाली लागू करने, अध्यक्ष की विवेकाधीन शक्तियों को सीमित करने और प्रत्येक निर्णय का कारण दर्ज करने का भी प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा अध्यक्ष, सदस्यों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए वार्षिक संपत्ति विवरण (IPR), इंटीग्रिटी डिक्लेरेशन और कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट डिक्लेरेशन अनिवार्य करने की बात कही गई है।

ज्ञापन में हर वर्ष परीक्षा कैलेंडर जारी करने, पूरी भर्ती प्रक्रिया के लिए निश्चित समय-सीमा तय करने और किसी भी देरी की स्थिति में कारण सार्वजनिक करने का सुझाव दिया गया है। प्रश्नपत्र सुरक्षा के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, क्यूआर कोड, जियो-फेंसिंग और डिजिटल ऑडिट ट्रेल जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर भी जोर दिया गया है।

उन्होंने IIT, NIT और केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विशेषज्ञों का गोपनीय पैनल बनाकर प्रश्नपत्र तैयार कराने, कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT), बायोमेट्रिक सत्यापन, फेस ऑथेंटिकेशन, AI आधारित निगरानी और CCTV सर्विलांस लागू करने की भी सिफारिश की है।
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बंधु तिर्की ने परीक्षा के बाद उत्तर कुंजी, अभ्यर्थियों के अंक, कट-ऑफ और चयन सूची सार्वजनिक करने, स्वतंत्र साइबर सुरक्षा ऑडिट कराने, ऑनलाइन शिकायत निवारण पोर्टल बनाने, संवेदनशील शाखाओं में अधिकारियों का नियमित स्थानांतरण करने तथा आयोग की वार्षिक रिपोर्ट सार्वजनिक करने का भी सुझाव दिया है।
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इसके अलावा प्रत्येक बड़ी परीक्षा का स्वतंत्र ऑडिट, सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और विशेषज्ञों की स्वतंत्र निगरानी समिति, पेपरलेस ई-ऑफिस प्रणाली, परीक्षा अपराधों पर कठोर कानूनी कार्रवाई और अभ्यर्थियों की सहायता के लिए कैंडिडेट फैसिलिटेशन एंड कम्युनिकेशन सेल की स्थापना की भी अनुशंसा की गई है।
बंधु तिर्की ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि इन सुझावों पर गंभीरतापूर्वक विचार कर आवश्यक निर्णय लिए जाएं, ताकि राज्य की भर्ती प्रणाली अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बन सके तथा युवाओं का भरोसा दोबारा मजबूत हो।





















