उलगुलान पदयात्रा से गूंजा आदिवासी अस्मिता का संदेश, मांगें नहीं मानी तो बड़े आंदोलन की चेतावनी

रांची: आदिवासी अस्मिता, जल-जंगल-जमीन की रक्षा और सीएनटी-एसपीटी कानूनों के कड़ाई से पालन की मांग को लेकर आदिवासी संगठनों ने उलगुलान पदयात्रा निकाली। यह पदयात्रा भगवान बिरसा मुंडा की जन्मस्थली खूंटी जिले के उलिहातु से शुरू होकर रांची के कोकर स्थित बिरसा मुंडा समाधि स्थल तक पहुंची।
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पदयात्रा में स्थानीय आदिवासी समाज की महिलाएं, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। इस दौरान आदिवासी अधिकारों, पारंपरिक जमीन और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। पदयात्रा में शामिल लोगों ने कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज की पहचान और जीवन का आधार है, इसलिए इनके संरक्षण के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।


रांची पहुंचने के बाद उलगुलान पदयात्रा में शामिल आदिवासी युवाओं ने सरकार को आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी। युवाओं ने कहा कि यदि राज्य सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती और उनका समाधान नहीं करती है, तो आने वाले दिनों में इससे भी बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।


पदयात्रा के माध्यम से आदिवासी संगठनों ने अपनी सामाजिक, सांस्कृतिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए एकजुटता का संदेश दिया। बिरसा मुंडा समाधि स्थल पर पहुंचकर पदयात्रा में शामिल लोगों ने भगवान बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।






















