आरक्षण हटाओ आंदोलन’ में खुलकर सामने आई रार, ब्रजेश पाठक से हर्ष दुबे की मुलाकात के बाद अजीत भारती का पलटवार
डेस्क । ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ को लेकर उसके समर्थकों और प्रमुख चेहरों के बीच मतभेद अब सार्वजनिक रूप से सामने आने लगे हैं। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के साथ हर्ष दुबे, मृत्युंजय पाठक और शिवा शर्मा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद आंदोलन से जुड़े प्रमुख नाम अजीत भारती ने इस पहल से खुद को अलग कर लिया। भारती ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए कहा कि हर्ष दुबे की प्रेस कॉन्फ्रेंस को ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ का समर्थन प्राप्त नहीं है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आंदोलन के नाम पर उक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस या जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान उनकी ओर से नहीं किया गया था।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!दरअसल, जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हर्ष दुबे और उनके साथियों ने उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक से मुलाकात की। इसके बाद लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। प्रेस कॉन्फ्रेंस में ब्रजेश पाठक ने कहा कि उनके पास आंदोलन से जुड़े लोगों की ओर से एक पत्र आया है, जिसे उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाया है। केंद्रीय नेतृत्व की ओर से मांगों पर गंभीरता से विचार करने का आश्वासन मिलने की बात भी उन्होंने कही।

ब्रजेश पाठक ने केंद्रीय नेतृत्व से बातचीत का दिया भरोसा
प्रेस कॉन्फ्रेंस में ब्रजेश पाठक ने कहा कि उनके साथ हर्ष दुबे, मृत्युंजय पाठक और शिवा शर्मा मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर पर हुए धरना-प्रदर्शन को लेकर इन लोगों की ओर से उन्हें एक पत्र मिला था। इस पत्र को केंद्रीय नेतृत्व के पास भेजा गया है।
पाठक के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व ने उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की बात कही है। उन्होंने यह भी कहा कि देश के युवाओं और छात्रों का किसी भी स्थिति में नुकसान नहीं होने दिया जाएगा और सभी को साथ लेकर चलने का प्रयास किया जाएगा।
ब्रजेश पाठक ने यह भी बताया कि करीब दो दिन बाद आंदोलन से जुड़े इन प्रतिनिधियों की केंद्रीय मंत्री के साथ बैठक कराने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि वह इन लोगों को साथ लेकर जाएंगे और उनकी बात संबंधित स्तर पर रखी जाएगी।
हर्ष दुबे ने कहा- ब्रजेश पाठक के जरिए केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाएंगे बात
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हर्ष दुबे ने कहा कि अपनी बात केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाने के लिए उनके पास ब्रजेश पाठक के अलावा कोई दूसरा माध्यम नहीं था। उन्होंने छात्रों के साथ हुई कथित कार्रवाई को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि आगे ऐसी स्थिति से बचने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
हर्ष दुबे ने कहा कि उपमुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री से मुलाकात कराने का भरोसा दिया है और उन्हें उम्मीद है कि ब्रजेश पाठक अपने आश्वासन पर खरे उतरेंगे। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से अपनी बात रखने की इच्छा भी जताई। हालांकि, उन्होंने कहा कि यदि उनसे सीधे मुलाकात संभव नहीं होती है तो किसी भी केंद्रीय मंत्री के सामने अपनी बात रखने के लिए वे तैयार हैं।
दुबे ने कहा कि उनके अनुसार इस पूरे विषय पर गंभीरता से विचार और चर्चा की जरूरत है।

पत्र में क्या रखी गई मांग?
हर्ष दुबे की ओर से ब्रजेश पाठक को दिए गए पत्र में मौजूदा शिक्षा व्यवस्था और छात्रों को मिलने वाले अवसरों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। पत्र में कहा गया है कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में कुछ विद्यार्थी मेरिट में ऊपर होते हैं और कुछ नीचे, जबकि पढ़ाई का स्तर समान माना जाता है।
पत्र में आंदोलन के मुख्य मुद्दे के रूप में सभी छात्रों की बौद्धिक क्षमता के समान विकास और आगे पेशेवर पाठ्यक्रमों में समान अवसर उपलब्ध कराने की बात कही गई है। इसके लिए अवसरों की संख्या बढ़ाने और नए अवसर पैदा करने की मांग भी रखी गई है, ताकि किसी छात्र के साथ अन्याय न हो और समाज के सभी वर्गों का हित सुनिश्चित हो सके।
ब्रजेश पाठक ने एक्स पर क्या लिखा?
प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ब्रजेश पाठक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी इस मुलाकात की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर ‘आरक्षण सुधार आंदोलन’ का नेतृत्व कर रहे हर्ष दुबे के साथ लखनऊ में पत्रकार वार्ता की गई।
उन्होंने कहा कि छात्रों के प्रतिनिधिमंडल की मांगों और उनकी चिंताओं को गंभीरता से सुना गया है। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि आगामी दो दिनों में उनकी मांगों को केंद्रीय नेतृत्व के सामने प्रभावी तरीके से रखा जाएगा और संबंधित केंद्रीय मंत्री से उनकी मुलाकात भी सुनिश्चित कराई जाएगी।
अजीत भारती ने प्रेस कॉन्फ्रेंस से किया किनारा
ब्रजेश पाठक की पोस्ट और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अजीत भारती ने इस पहल पर सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी। भारती ने एक्स पर लिखा कि ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ की ओर से हर्ष दुबे की प्रेस कॉन्फ्रेंस को कोई समर्थन नहीं है।
उन्होंने कहा कि वह वैचारिक रूप से इस आंदोलन से जुड़े रहे हैं और इसी वजह से जंतर-मंतर पर उनकी उपस्थिति थी। लेकिन उनके मुताबिक न तो उन्होंने यह आंदोलन बुलाया था और न ही प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था।
भारती ने आंदोलन में शामिल लोगों से घर लौटने की अपील भी की और कहा कि उन्होंने पहले ही इतनी जल्दी लोगों को किसी आंदोलन के लिए बुलाने से मना किया था।

आंदोलन समाप्त नहीं हुआ’, भारती ने दी आगे बड़े प्रदर्शन की चेतावनी
अजीत भारती ने अपनी पोस्ट में यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की कि उनके अनुसार ब्रजेश पाठक के साथ हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस को आंदोलन की समाप्ति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि किसी भी राजनीतिक दल को यह नहीं समझना चाहिए कि आंदोलन समाप्त हो गया है। उनके मुताबिक आगे इस मुद्दे पर चर्चा की जाएगी, लोगों को इसके बारे में बताया जाएगा और आने वाले समय में इससे भी बड़ी संख्या में लोगों को जुटाया जाएगा।
हालांकि, इसी पोस्ट में भारती ने हर्ष दुबे के पिता को विधायक के टिकट के लिए शुभकामनाएं देते हुए राजनीतिक तंज भी किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि यदि उनके माध्यम से कोई सवर्ण विधानसभा तक पहुंचता है तो वह वहां आरक्षण की मौजूदा नीतियों का विरोध करेगा। इसी टिप्पणी को लेकर विवाद और अधिक तीखा हो गया।
RHA के एक्स हैंडल ने अजीत भारती को दिया जवाब
अजीत भारती की टिप्पणी के बाद ‘Reservation Hatao Andolan’ से जुड़े एक्स हैंडल की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई। पोस्ट में हर्ष दुबे को वैचारिक मित्र बताते हुए कहा गया कि यह आंदोलन किसी एक नेता पर निर्भर नहीं है।
RHA की ओर से कहा गया कि जंतर-मंतर पर जुटी भीड़ से यह स्पष्ट है कि आंदोलन किसी एक व्यक्ति के नेतृत्व का मोहताज नहीं है। पोस्ट में अजीत भारती, नेहा दास, महिपाल सिंह, अनिल मिश्रा और हर्ष दुबे सहित कई लोगों के योगदान का उल्लेख किया गया।
RHA ने यह भी कहा कि किसी एक व्यक्ति के आंदोलन से अलग होने या सक्रिय भूमिका में नहीं रहने से आंदोलन रुकता नहीं है और मांगों की पूर्ति होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
आंदोलन की प्रमुख मांगें क्या हैं?
‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ से जुड़े पोस्ट में कई मांगें रखी गई हैं। इनमें यूजीसी एक्ट को वापस लेने, एससी/एसटी एक्ट को दोबारा लागू करने, सभी के लिए समान अवसर और एक समान कट-ऑफ की व्यवस्था करने जैसी मांगें शामिल हैं।
इसके अलावा जाति आधारित कल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा, एससी, एसटी और ओबीसी वर्गों में क्रीमी लेयर के सिद्धांत को लागू करने तथा जाति आधारित आरक्षण की जगह आर्थिक स्थिति को आधार बनाकर आरक्षण व्यवस्था में सुधार करने की मांग भी आंदोलन से जुड़े पोस्ट में की गई है।
आंदोलन से जुड़े एक अन्य पोस्ट में समर्थकों से यह अपील भी की गई कि किसी व्यक्ति के पीछे हटने या सोशल मीडिया पर सक्रियता कम होने से आंदोलन को बंद नहीं किया जाना चाहिए। पोस्ट में कहा गया कि आंदोलन आगे भी जारी रहेगा और आने वाले समय में बड़े स्तर पर संघर्ष किया जाएगा।
नेतृत्व और रणनीति को लेकर बढ़ी खींचतान
पूरे घटनाक्रम से इतना स्पष्ट है कि ‘आरक्षण हटाओ आंदोलन’ के भीतर अब रणनीति और प्रतिनिधित्व को लेकर मतभेद सार्वजनिक हो चुके हैं। एक ओर हर्ष दुबे और उनके साथियों ने सरकार के प्रतिनिधि के जरिए केंद्रीय नेतृत्व तक अपनी मांग पहुंचाने की पहल की है, वहीं अजीत भारती ने इस पहल को आंदोलन की आधिकारिक रणनीति मानने से इनकार किया है।
दूसरी ओर, RHA के सोशल मीडिया हैंडल ने यह संकेत दिया है कि आंदोलन किसी एक चेहरे पर निर्भर नहीं है और अलग-अलग लोगों की भूमिका के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा।
अब देखना होगा कि केंद्रीय नेतृत्व के साथ प्रस्तावित बैठक के बाद इस आंदोलन की दिशा क्या रहती है और क्या आंदोलन से जुड़े अलग-अलग गुट किसी साझा रणनीति पर सहमत हो पाते हैं या यह मतभेद आगे और गहरा होता है।

















