Who is Ameesha Prasad, and why did she join the student movement?

हजारीबाग से रांची तक…कौन है अमीषा प्रसाद और विवादों में क्यों है इसका नाम

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न नौकरी की तलाश, न प्रतियोगी परीक्षा… फिर छात्र आंदोलन में अमीषा प्रसाद की मौजूदगी क्यों?

 

रांची। पेपर लीक, नियुक्तियों में कथित गड़बड़ी और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर झारखंड समेत देशभर में युवाओं का आक्रोश लगातार सामने आ रहा है। झारखंड में भी छात्र संगठनों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों ने नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर आंदोलन शुरू किया है। इसी आंदोलन के दौरान रांची में सामने आई एक घटना ने अब आंदोलन में शामिल लोगों और उनकी पृष्ठभूमि को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

21 अगस्त की शाम रांची के शहीद चौक पर छात्रों की ओर से मुख्यमंत्री का पुतला दहन कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान एक व्यक्ति द्वारा पुतला छीनने के बाद विवाद और हंगामा हो गया। इसी घटना के बाद अमीषा प्रसाद नाम की युवती का नाम चर्चा में आया। पुलिस ने 22 अगस्त को उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की। फिलहाल उसके सदर अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी सामने आई है।

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छात्र आंदोलन में अमीषा की मौजूदगी पर सवाल

अमीषा प्रसाद की पहचान को लेकर जब पड़ताल की गई तो सामने आया कि उपलब्ध सोशल मीडिया गतिविधियों के अनुसार वह न तो प्रतियोगी परीक्षा की अभ्यर्थी हैं और न ही छात्र आंदोलन से सीधे तौर पर जुड़ी किसी छात्र संगठन की सदस्य के रूप में उनकी पहचान सामने आती है। वह नौकरी की तलाश करने वाली अभ्यर्थी या किसी अभ्यर्थी के अभिभावक भी नहीं हैं।

ऐसे में नियुक्तियों और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर चल रहे आंदोलन में उनकी मौजूदगी ने कई सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, किसी आंदोलन में किसी व्यक्ति की मौजूदगी मात्र से उसके उद्देश्य या भूमिका के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। उनकी भूमिका को लेकर पुलिस की जांच और संबंधित पक्षों के बयान महत्वपूर्ण होंगे।

अप्रैल में हजारीबाग में भी आई थीं चर्चा में

अमीषा प्रसाद का नाम इससे पहले अप्रैल में हजारीबाग के विष्णुगढ़ में बच्ची की हत्या के बाद हुए विरोध-प्रदर्शन के दौरान सामने आया था। उस समय वह संपूर्णा संकट मोचन फाउंडेशन के बैनर तले प्रदर्शन में शामिल बताई गई थीं। प्रदर्शन के दौरान बच्ची की हत्या के आरोपियों को फांसी देने की मांग की गई थी।

बाद में पुलिस जांच में इस मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और जांच के दौरान यह बात सामने आने की खबरें आईं कि घटना के बाद मामले को प्रभावित करने तथा पुलिस को भ्रमित करने के लिए विरोध-प्रदर्शन और मामले को धार्मिक रंग देने की कोशिश की गई थी। इस पूरे प्रकरण में पुलिस की जांच के निष्कर्ष ही अंतिम आधार माने जाएंगे।

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जून में रांची के अस्पताल विवाद में भी नाम आया

इसके बाद जून में अमीषा प्रसाद एक बार फिर रांची में चर्चा में आईं। कोकर चौक स्थित सैमफोर्ड अस्पताल में हुए विवाद को लेकर उनका नाम सामने आया था। आरोप था कि अस्पताल प्रबंधन की ओर से मरीजों और उनके परिजनों के साथ दुर्व्यवहार किया गया तथा विरोध करने पर बाउंसरों से मारपीट कराई गई।

वहीं अस्पताल प्रबंधन की ओर से अमीषा प्रसाद के खिलाफ सदर थाने में एससी-एसटी एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज कराए जाने की बात सामने आई थी। इसी मामले में पुलिस की कार्रवाई भी हुई थी। इस मामले में आरोपों और प्राथमिकी में दर्ज तथ्यों को अदालत में साबित होना बाकी है।

अगस्त में छात्र आंदोलन में सक्रियता

अब अगस्त में रांची में शुरू हुए छात्र आंदोलन के दौरान अमीषा प्रसाद की मौजूदगी ने एक बार फिर उन्हें चर्चा में ला दिया है। सोशल मीडिया पर सामने आए पोस्ट और वीडियो के आधार पर वह आंदोलन से जुड़ी गतिविधियों में नजर आती हैं।

21 अगस्त के पुतला दहन कार्यक्रम से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। वीडियो को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं और एक लड़की का दुपट्टा खींचे जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, वीडियो के आधार पर घटना की पूरी पृष्ठभूमि और उसमें शामिल लोगों की भूमिका का स्वतंत्र रूप से निष्कर्ष निकालना संभव नहीं है। इसकी पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

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आंदोलन की मूल मांगों से अलग हो रहा विवाद?

झारखंड में छात्रों का आंदोलन मूल रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं, नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं जैसे मुद्दों को लेकर है। ऐसे में आंदोलन के दौरान ऐसे विवादों का सामने आना, जिनका मूल छात्र और रोजगार के मुद्दों से सीधा संबंध नहीं है, आंदोलन की छवि और उसकी दिशा को लेकर भी चर्चा पैदा कर रहा है।

अब बड़ा सवाल यह है कि 21 अगस्त की घटना में अमीषा प्रसाद की वास्तविक भूमिका क्या थी और वह छात्र आंदोलन से किस उद्देश्य से जुड़ी थीं। इन सवालों का जवाब पुलिस जांच, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों से ही स्पष्ट हो सकेगा।

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