एमएमडीआर संशोधन बिल (MMDR Amendment Bill )पर आदित्य साहू बोले , बोले- JMM भ्रम न फैलाएं
रांची। संसद से पारित खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (MMDR Amendment Bill) को लेकर झारखंड में सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विरोध और केंद्र सरकार पर लगाए जा रहे आरोपों पर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने पलटवार किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री पर विधेयक के बहाने जनता को गुमराह करने और राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!आदित्य साहू ने कहा कि विधेयक को लेकर झामुमो सहित विपक्ष की ओर से जताई जा रही आशंकाएं और लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद एवं निराधार हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से इस मुद्दे पर भ्रम और गुमराह करने की राजनीति नहीं करने की अपील की।

सेस के मामले में पूरे देश में एकरूपता लाने का प्रयास’
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सेस का विषय केवल झारखंड से जुड़ा नहीं है, बल्कि पूरे देश से संबंधित है। केंद्र सरकार खनिज क्षेत्र में एकरूपता लाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि आज देश में ‘वन नेशन, वन टैक्स’ की बात हो रही है और सेस के नाम पर हो रही कथित लूट पर भी रोक लगनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि देश की जनता को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भरोसा है और वे ऐसा कोई कदम नहीं उठाएंगे जिससे देश या राज्यों के लोगों का अहित हो।
खनिज संशोधन बिल: JMM ने केंद्र से पूछा झारखंड के अधिकारों पर दिल्ली का पहरा क्यों?
मुख्यमंत्री संविधान पढ़ें, केंद्र से टकराव राज्यहित में नहीं’
आदित्य साहू ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर उन्हें छात्रों पर दमनात्मक कार्रवाई से फुर्सत मिल गई हो तो उन्हें संविधान भी पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत एक संघीय गणराज्य है, जहां केंद्र और राज्यों की शक्तियां संविधान में स्पष्ट रूप से निर्धारित हैं।
उन्होंने कहा कि संविधान और व्यवस्था के दायरे में समाधान तलाशने के बजाय केंद्र सरकार से टकराव की स्थिति पैदा करना राज्यहित में नहीं है। साहू ने आरोप लगाया कि छात्र आंदोलन से ध्यान भटकाने के लिए झामुमो को आंदोलन के लिए उकसाना भी झारखंड के हित में नहीं है।

खनन क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी और निवेश-अनुकूल बनाएगा विधेयक
भाजपा नेता ने एमएमडीआर संशोधन विधेयक को विकसित भारत की दिशा में सकारात्मक कदम बताया। उन्होंने कहा कि संशोधन से खनन क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी, पारदर्शी, पूर्वानुमेय और निवेशक-अनुकूल बनेगा।
उनके मुताबिक इससे निवेश, खनिज उत्पादन, विनिर्माण, बुनियादी ढांचा, रोजगार, ऊर्जा सुरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा।
राज्यों के अधिकार और राजस्व पर असर नहीं पड़ेगा
आदित्य साहू ने दावा किया कि संशोधन विधेयक भूमि और खनिजों पर राज्यों के अधिकार को समाप्त नहीं करता और न ही राज्यों द्वारा खनिजों पर लगाए एवं वसूल किए जाने वाले करों को खत्म करता है।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्यों को कर लगाने से नहीं रोक रही है। संशोधन के जरिए यह प्रावधान किया जा रहा है कि राज्य सरकारें केंद्र द्वारा निर्धारित नियमों के अनुरूप कर, सेस या अन्य अधिभार लगा सकें, जिससे खनिज क्षेत्र में एकरूपता और स्थिरता सुनिश्चित हो।
साहू ने कहा कि खनिज-समृद्ध राज्यों को मिलने वाली रॉयल्टी, नीलामी प्रीमियम, जिला खनिज फाउंडेशन (DMF) और राष्ट्रीय खनिज अन्वेषण ट्रस्ट (NMET) से होने वाली आय पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। राज्यों को जीएसटी में उनकी हिस्सेदारी भी मिलती रहेगी।
झारखंड में सात साल में केवल तीन खनिज ब्लॉकों की नीलामी क्यों?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने झारखंड सरकार की खनिज नीति और नीलामी प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि खनिज संसाधनों की दृष्टि से देश के सबसे समृद्ध राज्यों में शामिल झारखंड में सरकार अपने सात वर्ष के कार्यकाल में केवल तीन खनिज खदानों की नीलामी करा सकी है।
उन्होंने दावा किया कि इसी अवधि में देशभर में 434 खनिज ब्लॉकों की नीलामी हुई। उनके अनुसार ओडिशा में 45 और छत्तीसगढ़ में 49 खदानों की नीलामी हुई। साहू ने कहा कि झारखंड में कम नीलामी के कारण राज्य को संभावित राजस्व का नुकसान हुआ है।
उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार को मौजूदा खदानों पर अतिरिक्त कर भार डालने के बजाय खनिज क्षेत्र से मिलने वाले राजस्व के नए स्रोत विकसित करने पर ध्यान देना चाहिए।
DMFT फंड को लेकर भी सरकार पर हमला
आदित्य साहू ने जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (DMFT) फंड के इस्तेमाल को लेकर भी हेमंत सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि बोकारो, चाईबासा, रांची, कोडरमा, रामगढ़ और धनबाद सहित राज्य के विभिन्न जिलों में करीब 2,000 करोड़ रुपये की अनियमितता या घोटाले का मामला सामने आया है।
उन्होंने दावा किया कि केवल बोकारो में ही 631 करोड़ रुपये के घोटाले की बात सामने आई है। हालांकि, ये आरोप भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की ओर से लगाए गए हैं और इनके संबंध में संबंधित सरकारी या जांच एजेंसियों का पक्ष इस बयान में उपलब्ध नहीं है।
साहू ने राज्य सरकार से सवाल किया कि अगर सरकार को झारखंड की खनिज संपदा की इतनी चिंता है तो अवैध खनन, खनिजों की कथित लूट और कथित खनन माफिया के खिलाफ अब तक क्या कार्रवाई की गई।
छात्रों के मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य में चल रहे छात्र आंदोलनों का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि छात्र परीक्षा और भर्ती में कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ सड़क पर हैं और सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। ऐसे समय में मुख्यमंत्री द्वारा नए महाआंदोलन की घोषणा किए जाने पर उन्होंने सवाल उठाया।
साहू ने आरोप लगाया कि सरकार इस मुद्दे के जरिए छात्रों के सवालों और अपनी जवाबदेही से जनता का ध्यान भटकाना चाहती है।
जनता ऐसी राजनीति का हिसाब अपने तरीके से करती है
आदित्य साहू ने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी मुद्दों से ध्यान भटकाने और टकराव की राजनीति का तरीका देखने को मिला है। उन्होंने कहा कि अंततः जनता ऐसी राजनीति का हिसाब अपने तरीके से करती है।
उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झामुमो से एमएमडीआर संशोधन विधेयक के मुद्दे को राजनीतिक टकराव का विषय बनाने के बजाय तथ्यों और संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर चर्चा करने की सलाह दी।

















