ACF-FRO अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत नहीं, नियुक्ति रद्द करने के सरकारी फैसले पर हाईकोर्ट ने रोक से किया इनकार
रांची: झारखंड में ACF और FRO भर्ती को लेकर चल रहे विवाद में अभ्यर्थियों को फिलहाल हाईकोर्ट से अंतरिम राहत नहीं मिली है। सोमवार को न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने ACF 2024 और FRO 2024 की नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर तत्काल रोक लगाने से इनकार कर दिया।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!मामले में सरकार के नोटिफिकेशन को चुनौती देते हुए दो अलग-अलग याचिकाएं दाखिल की गई हैं। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत का ध्यान उन मामलों की ओर दिलाया गया, जिनमें जेएसएससी-सीजीएल, 11वीं से 13वीं जेपीएससी और सीडीपीओ नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े सरकारी फैसलों पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई है।

प्रार्थियों की ओर से दलील दी गई कि ACF और FRO की भर्ती प्रक्रिया के मामले में भी इसी तरह संरक्षण दिया जाए। आशंका जताई गई कि यदि सरकार के फैसले पर रोक नहीं लगी तो नई भर्ती के लिए विज्ञापन जारी किया जा सकता है। इससे मौजूदा प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थियों की स्थिति और जटिल हो सकती है।
अदालत ने इस स्तर पर नियुक्ति रद्द करने के आदेश पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि यदि सरकार की ओर से नई नियुक्ति का विज्ञापन जारी किया जाता है, तो याचिकाकर्ता इंटरवेंशन एप्लीकेशन (IA) के माध्यम से अदालत का रुख कर सकते हैं।

सरकार से मांगा जवाब
हाईकोर्ट ने मामले में राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। सरकार की ओर से सुनवाई के दौरान महाधिवक्ता रोहिय राय ने पक्ष रखा।
अब इस मामले में अगली सुनवाई 24 सितंबर को होगी। उस दिन सरकार के जवाब के बाद नियुक्ति प्रक्रिया रद्द किए जाने के फैसले को लेकर अदालत में आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

अभ्यर्थियों की नजर अगली सुनवाई पर
ACF और FRO भर्ती प्रक्रिया से जुड़े अभ्यर्थियों के लिए अगली सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है। फिलहाल कोर्ट ने सरकारी आदेश पर अंतरिम रोक नहीं लगाई है, ऐसे में नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर आगे सरकार क्या कदम उठाती है और 24 सितंबर को अदालत का रुख क्या रहता है, इस पर सभी की नजर रहेगी।
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