Police visited 41 schools in Giridih.

गिरिडीह में 41 स्कूलों में पहुंची पुलिस, बच्चों को पढ़ाया कानून और साइबर सुरक्षा का पाठ

एसपी डॉ. बिमल कुमार ने खुद संभाली क्लास, विद्यार्थियों को बताया जीरो एफआईआर से लेकर डिजिटल अरेस्ट तक का सच

गिरिडीह: पुलिस को आमतौर पर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए देखा जाता है, लेकिन गिरिडीह में पुलिस का एक अलग ही रूप देखने को मिला। यहां खाकी वर्दी में अधिकारी स्कूलों की कक्षाओं में पहुंचे और बच्चों को कानून, साइबर अपराध तथा सड़क सुरक्षा की जानकारी दी।

WhatsApp Group Join Now
Telegram Group Join Now
Instagram Group Join Now
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

गिरिडीह एसपी डॉ. बिमल कुमार की पहल पर जिले के 41 विद्यालयों में एक साथ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। अभियान के दौरान डीएसपी, इंस्पेक्टर और थाना-ओपी प्रभारियों ने अलग-अलग स्कूलों में विद्यार्थियों से बातचीत की और उन्हें रोजमर्रा की जिंदगी में कानून के प्रति सजग रहने के तरीके बताए।

जमुआ में एसपी ने खुद ली बच्चों की क्लास

अभियान के दौरान एसपी डॉ. बिमल कुमार स्वयं जमुआ थाना क्षेत्र के लंगटा बाबा उच्च विद्यालय, मिर्जागंज पहुंचे। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ सीधे संवाद करते हुए कई कानूनी और व्यवहारिक मुद्दों को आसान भाषा में समझाया।

बच्चों को बताया गया कि किसी घटना की शिकायत दर्ज कराने के लिए केवल स्थानीय थाने तक सीमित रहना जरूरी नहीं है। जीरो एफआईआर और ई-एफआईआर जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल किस परिस्थिति में किया जा सकता है, इसकी भी जानकारी दी गई। इसके साथ डिजिटल साक्ष्यों के महत्व और महिलाओं व बच्चों की सुरक्षा से जुड़े कानूनी प्रावधानों पर चर्चा हुई।

RKDF
advertisement

साइबर ठग किस तरह बिछाते हैं जाल, बच्चों को समझाया

मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल को देखते हुए साइबर अपराध जागरूकता पर विशेष जोर दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने विद्यार्थियों को बताया कि ठग अलग-अलग तरीकों से लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं।

कार्यक्रम में म्यूल अकाउंट, टास्क फ्रॉड, सोशल मीडिया के जरिए ब्लैकमेलिंग, सेक्सटॉर्शन और डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों के बारे में जानकारी दी गई। बच्चों को समझाया गया कि अनजान लिंक, संदिग्ध कॉल या लालच देने वाले ऑनलाइन ऑफर पर भरोसा नहीं करना चाहिए।

पुलिस ने यह भी बताया कि साइबर ठगी होने की स्थिति में तत्काल 1930 पर संपर्क करना चाहिए और ऑनलाइन शिकायत दर्ज करानी चाहिए, ताकि समय रहते रकम को फ्रीज कराने की कोशिश की जा सके।

नाबालिगों के वाहन चलाने पर भी चेतावनी

स्कूलों में सड़क सुरक्षा को लेकर भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। पुलिस ने 18 वर्ष से कम उम्र में वाहन चलाने के कानूनी और जानलेवा जोखिमों की जानकारी दी।

दोपहिया वाहन चलाते समय हेलमेट पहनने, ट्रिपल राइडिंग से बचने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की गई। अधिकारियों ने बच्चों को यह भी बताया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले लोगों के अधिकारों और संरक्षण से जुड़े गुड सेमेरिटन प्रावधानों की जानकारी होना भी जरूरी है।

Kashmir vastaralay
Advertisment

सवाल पूछने के लिए बच्चों को किया प्रोत्साहित

कार्यक्रम की खास बात यह रही कि पुलिस अधिकारियों ने सिर्फ भाषण देने के बजाय विद्यार्थियों के साथ संवाद किया। बच्चों ने साइबर अपराध, कानून और यातायात नियमों से जुड़े सवाल पूछे, जिनका अधिकारियों ने सरल तरीके से जवाब दिया।

पुलिस की वर्दी में अधिकारियों को शिक्षक की भूमिका में देखकर विद्यार्थियों में भी उत्साह नजर आया। अभियान का उद्देश्य बच्चों और पुलिस के बीच संवाद बढ़ाने के साथ उन्हें अपने अधिकारों, जिम्मेदारियों और सुरक्षा उपायों के प्रति जागरूक करना रहा।

एसपी बोले- जागरूक बच्चे ही बनाएंगे सुरक्षित समाज

एसपी डॉ. बिमल कुमार ने कहा कि बच्चे समाज के भविष्य हैं। उन्हें यदि कम उम्र से ही कानून, साइबर सुरक्षा और सड़क सुरक्षा की सही जानकारी दी जाए, तो वे खुद भी सुरक्षित रहेंगे और अपने परिवार व समाज को भी जागरूक कर सकेंगे।

उन्होंने कहा कि पुलिस की भूमिका केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई तक सीमित नहीं है। अपराध की रोकथाम के लिए लोगों को जागरूक करना और युवाओं को सही जानकारी देना भी पुलिस की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसी सोच के साथ जिले के 41 स्कूलों में एक साथ जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया।

नई और ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें — Drishti Now