14वीं JPSC कथित गड़बड़ी मामला: पूर्व JPSC अध्यक्ष एल ख्यांग्ते को अभी जेल में ही रहना होगा , जमानत याचिका खारिज
रांची: 14वीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितता के मामले में झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते को कोर्ट से झटका लगा है। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी। जाहिर है पिछले दिनों जमानत पर दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान ख्यांग्ते की ओर से अदालत में दलील दी गई कि उनके खिलाफ मामले में कोई ठोस साक्ष्य नहीं है। यह भी कहा गया कि जांच एजेंसी की ओर से की गई छापेमारी में भी उनके खिलाफ कोई आपत्तिजनक साक्ष्य नहीं मिला है।

वहीं, CID ने जमानत का विरोध करते हुए परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी TDPL को काम दिए जाने में ख्यांग्ते की भूमिका का आरोप लगाया। जांच एजेंसी के मुताबिक, TDPL की ओर से आयोजित परीक्षाओं में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही थी और इसकी जानकारी ख्यांग्ते को थी। इसके बावजूद उन्होंने कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं की।
2 करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप
CID की जांच में एल ख्यांग्ते पर TDPL से कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये कमीशन लेने का आरोप भी सामने आया है। हालांकि, ये आरोप जांच एजेंसी के मामले का हिस्सा हैं और अदालत में इनका अंतिम रूप से साबित होना अभी बाकी है।
ख्यांग्ते की ओर से वरीय अधिवक्ता अनिल कुमार और अधिवक्ता चंदना कुमारी ने अदालत में पक्ष रखा।
CID ने दर्ज किया है कांड संख्या 16/2026
14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर CID ने कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया है। इसी मामले की जांच के दौरान CID ने एल ख्यांग्ते को गिरफ्तार किया था। उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की गई थी। इसके बाद से वह न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं।
CID की कार्रवाई के दायरे में अब तक इस मामले में 20 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
अभय तिवारी के बयान में ख्यांग्ते का नाम
इस मामले में जांच एजेंसी के लिए अभय तिवारी का कथित स्वीकारोक्ति बयान भी महत्वपूर्ण बताया जा रहा है। CID के अनुसार, JPSC नियुक्ति घोटाले में कथित रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अभय तिवारी ने अधिकारियों के समक्ष दिए बयान में पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते की भूमिका का उल्लेख किया है।

जांच एजेंसी का दावा है कि अभय तिवारी ने अपने बयान में TDPL को परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी के रूप में चयन किए जाने में ख्यांग्ते की अहम भूमिका होने की बात कही है।
फिलहाल अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद एल ख्यांग्ते को जेल में ही रहना होगा। मामले की जांच CID की ओर से जारी है और आरोपों की न्यायिक प्रक्रिया के दौरान आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।

















