Corruption allegations against the Directorate of Agriculture; demand to halt work orders and payments for 14 companies.

कृषि निदेशालय पर भ्रष्टाचार के आरोप, 14 कंपनियों के कार्यादेश व भुगतान रोकने की मांग

Corruption allegations against the Directorate of Agriculture; demand to halt work orders and payments for 14 companies.
Corruption allegations against the Directorate of Agriculture; demand to halt work orders and payments for 14 companies.

दिल्ली: झारखंड के कृषि निदेशालय में कथित अनियमितताओं को लेकर अखिल भारतीय किसान सभा ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के समक्ष शिकायत दर्ज कराई है। संगठन के राष्ट्रीय सचिव केडी सिंह और राज्य कार्यकारिणी सदस्य सह जिला मंत्री अजय कुमार ने दिल्ली स्थित शास्त्री भवन में डिप्टी कमिश्नर योगेश ए. रौंडल से मुलाकात कर स्मार पत्र सौंपा।

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स्मार पत्र में आरोप लगाया गया है कि कृषि निदेशालय ने वर्ष 2023 में गंभीर अनियमितताओं के कारण 14 कंपनियों को काली सूची में डाला था। बाद में इन कंपनियों को तार्किक आदेश के माध्यम से मुक्त कर दिया गया। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कंपनियों को मुक्त करने की शर्तों के तहत किसानों के खेतों में लगाए गए कथित कम गुणवत्ता वाले उपकरणों के बैच नंबर बदलकर दोबारा CIPET से जांच कराने और रिपोर्ट कृषि निदेशक को सौंपने का निर्देश दिया गया था, लेकिन जांच रिपोर्ट अब तक प्राप्त नहीं हुई है।

शिकायत में तत्कालीन कृषि निदेशक ताराचंद के 18 मार्च 2024 के आदेश का भी हवाला दिया गया है। आरोप है कि आदेश में जांच रिपोर्ट प्राप्त होने तक संबंधित कंपनियों के कार्यादेश शिथिल रखने तथा हजारीबाग उपायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर FIR दर्ज करने का निर्देश दिया गया था। किसान सभा का आरोप है कि इसके बावजूद कंपनियों को दोबारा कार्यादेश दिए गए और करोड़ों रुपये का भुगतान किया गया।

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शिकायतकर्ताओं ने विशेष रूप से भारत ड्रिप इरीगेशन एंड एग्रो को लेकर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि काली सूची में रहने के बावजूद इस कंपनी को बड़ी संख्या में कार्यादेश और भुगतान दिए गए। संगठन ने पूरे झारखंड में कंपनी द्वारा किए गए कार्यों की सूची सार्वजनिक करने और जिला स्तर पर संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित करने की मांग की है।

किसान सभा ने केंद्र से सभी 14 कंपनियों के कार्यादेश और भुगतान पर रोक लगाने, मामले की जांच के लिए SIT गठित करने तथा PMKSY के तहत दिए गए अनुदान की वसूली पर विचार करने की मांग की है। साथ ही जांच समिति में CPI के प्रतिनिधियों को शामिल करने की मांग भी रखी गई है।

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