सरायकेला : ईसाई धर्म से मूल आदिवासी धर्म-संस्कृति में लौटे दो परिवार, पारंपरिक रीति-रिवाज से हुआ स्वागत
अश्वनी पाठक
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सरायकेला-खरसावां। खरसावां प्रखंड की ढलाईकेला पंचायत अंतर्गत बनाईकेला गांव में ईसाई धर्म अपना चुके दो आदिवासी परिवारों ने अपनी इच्छा से मूल आदिवासी धर्म और पारंपरिक संस्कृति में लौटने का निर्णय लिया। सुनील सोय और लखिन्द्र सोय के परिवारों की घर वापसी पर गांव और समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ उनका स्वागत किया।
बताया गया कि आदिवासी हो समाज महासभा के पदाधिकारियों, हातु मुंडा, दियुरी, समाज के बुद्धिजीवियों और ग्रामीणों की मौजूदगी में दोनों परिवारों के लिए पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए गए। इस दौरान नदी स्नान, पारंपरिक पूजा-पाठ और देशाउली में लाल मुर्गे की बलि समेत विभिन्न रस्में निभाई गईं। अनुष्ठान पूरा होने के बाद दोनों परिवारों को विधिवत गांव और समाज में शामिल किया गया।

समाज के लोगों के अनुसार, आदिवासी समाज की पहचान उसकी भाषा, संस्कृति, पर्व-त्योहार और प्रकृति से जुड़ी परंपराओं से है। उनके मुताबिक, दोनों परिवारों ने अपनी इच्छा से अपनी पारंपरिक धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से दोबारा जुड़ने का फैसला किया है।
घर वापसी के बाद परिवारों ने कहा कि वे आगे अपने पारंपरिक पर्व-त्योहार और रीति-रिवाजों का पालन करेंगे। उन्होंने मागे पोरोब, बह पोरोब, जोमनामा, हेरो पोरोब, जोनोम दस्तूर, गोनोय दस्तूर, आंदी दस्तूर और आदींग बोंगा पूजा जैसी परंपराओं को निभाने तथा समाज के सुख-दुख में सहभागी बनने की बात कही।
कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों और समाज के लोगों ने दोनों परिवारों का स्वागत किया। उपस्थित लोगों ने इसे आदिवासी परंपरा, संस्कृति और सामाजिक जड़ों से दोबारा जुड़ने की पहल बताया।
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कार्यक्रम में हो समाज महासभा की अध्यक्षिका सावित्री कुदादा, उपाध्यक्ष मनोज कुमार सोय, प्रखंड अध्यक्ष रामलाल हेम्ब्रम, मंगल सिंह जामुदा, तुराम वोयपाई, सालेन सोय, सूरज सोय, सिद्धेश्वर कुदादा, छोटे सोय, बुधराम सोय, जगमोहन सोय, राजेन सोय, मानसिंह बांकिरा और सोनामुनी सोय समेत बड़ी संख्या में समाज के बुद्धिजीवी एवं ग्रामीण मौजूद थे।

















