धनबाद में भू-धंसान का कहर: छाताबाद में फिर धंसी जमीन, एक दर्जन घर और सामुदायिक भवन प्रभावित


घटना के बाद लोग अपने घरों से जरूरी सामान निकालकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे। रिपोर्ट के मुताबिक, भू-धंसान की चपेट में आने से दो महिलाएं भी घायल हुई हैं। स्थानीय लोगों में घटना को लेकर भय का माहौल है।

जिस सामुदायिक भवन में लोगों ने ली थी शरण, वही प्रभावित
छाताबाद में इससे पहले भी भू-धंसान की घटनाएं हो चुकी हैं। 7 जुलाई और 7 अगस्त की घटनाओं के बाद प्रभावित परिवारों ने घटनास्थल से करीब 100 मीटर दूर स्थित सामुदायिक भवन में शरण ली थी। ताजा घटना में वही सामुदायिक भवन भी प्रभावित हो गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई सप्ताह से इलाके में भू-धंसान का खतरा बना हुआ है और प्रभावित परिवार स्थायी पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। 12 सितंबर को भी छाताबाद के काजू बागान क्षेत्र में गोफ बनने और तालाब का पानी जमीन में समाने की घटना सामने आई थी।

घटना से पहले BCCL ने लगाया था नोटिस
जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, घटना से कुछ समय पहले BCCL प्रबंधन ने इलाके में नोटिस चस्पा कर लोगों को सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी थी। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रबंधन पर समय रहते पुनर्वास नहीं कराने का आरोप लगाया। वहीं BCCL के गोविंदपुर क्षेत्र के जीएम सत्यकाम आनंद के अनुसार, इलाके को असुरक्षित घोषित किया गया है और लोगों को जल्द सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जा रही है।
प्रशासन की टीम भी मौके पर पहुंची। बाघमारा सीओ गिरजानंद किस्कू और कतरास थाना प्रभारी ने घटनास्थल का जायजा लिया। प्रभावित क्षेत्र को घेरकर लोगों को वहां जाने से रोका गया है।

धनबाद में कितना बड़ा है भू-धंसान का खतरा?
भू-धंसान की समस्या सिर्फ छाताबाद तक सीमित नहीं है। 15 सितंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार धनबाद कोयलांचल में 100 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को संवेदनशील माना जा रहा है और करीब 2.3 से 2.75 लाख लोगों के प्रभावित होने का अनुमान सामने आया है। हालांकि ये क्षेत्रवार अनुमान हैं और इन्हें सरकारी रूप से चिह्नित प्रभावित क्षेत्र का अंतिम आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।
उपलब्ध क्षेत्रवार अनुमानों के अनुसार धनबाद शहर से सटे इलाके में करीब 10 वर्ग किमी, झरिया में 25 वर्ग किमी, कतरास में 40 वर्ग किमी और निरसा में करीब 40 वर्ग किमी क्षेत्र को संवेदनशील बताया गया है।
सवाल सिर्फ भू-धंसान का नहीं, पुनर्वास का भी
छाताबाद की घटनाएं एक बड़ा सवाल खड़ा करती हैं—जब किसी इलाके को असुरक्षित घोषित कर दिया जाता है, तो वहां रहने वाले परिवारों के लिए सुरक्षित पुनर्वास की व्यवस्था कब होगी?
BCCL की ओर से कतरास के सात खतरनाक इलाकों में लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर जाने की चेतावनी भी दी गई है। ऐसे में स्थानीय लोगों की मुख्य मांग अब सिर्फ तत्काल राहत नहीं, बल्कि सुरक्षित पुनर्वास, मुआवजा और भू-धंसान प्रभावित इलाकों का वैज्ञानिक सर्वे है।

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