माध्यमिक आचार्य परीक्षा में सफल 102 अभ्यर्थियों की डिग्रियों की होगी जांच, विभाग ने मांगा रिकॉर्ड
रांची। झारखंड के सरकारी स्कूलों में माध्यमिक आचार्य पद पर नियुक्ति के लिए चयनित अभ्यर्थियों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर सवाल उठे हैं। एक समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, माध्यमिक आचार्य परीक्षा में सफल 102 अभ्यर्थियों की डिग्रियों की जांच कराई जाएगी। स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इस संबंध में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के सचिव को पत्र भेजकर संबंधित शैक्षणिक रिकॉर्ड की जांच का अनुरोध किया है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) ने माध्यमिक आचार्य नियुक्ति के लिए कुल 877 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की अनुशंसा की है। इनमें 244 अभ्यर्थी ऐसे बताए गए हैं, जिन्होंने निजी विश्वविद्यालयों से पीजी और बीएड की डिग्री हासिल की है। इन्हीं में से 102 अभ्यर्थियों ने राज्य के दो निजी विश्वविद्यालयों से डिग्री प्राप्त की है।

102 अभ्यर्थियों की डिग्री पर क्यों उठे सवाल?
रिपोर्ट में बताया गया है कि इन अभ्यर्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड की जांच में कुछ मामलों में स्नातक और पीजी के अंकों तथा दोनों डिग्रियों के बीच समय-अंतर को लेकर अंतर सामने आया है।
कुछ अभ्यर्थियों ने स्नातक में 47 से 54 प्रतिशत के बीच अंक हासिल किए, जबकि इसके करीब 15 से 18 वर्ष बाद 2022-24 के दौरान पीजी की डिग्री हासिल की और उसमें 67 से 68 प्रतिशत तक अंक प्राप्त किए।
रिपोर्ट के अनुसार, एक अभ्यर्थी ने वर्ष 2014 में स्नातक में 47.81 प्रतिशत अंक हासिल किए थे, जबकि वर्ष 2022-24 में पीजी में 67.19 प्रतिशत अंक मिले।

11 अभ्यर्थियों ने 10 साल या उससे अधिक बाद किया पीजी
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि सफल अभ्यर्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड की जांच में 11 अभ्यर्थियों ने स्नातक के 10 साल या उससे अधिक समय बाद पीजी की पढ़ाई की।
वहीं, 20 से अधिक अभ्यर्थियों के स्नातक और पीजी के बीच 8 से 9 वर्ष का अंतर बताया गया है।
इन तथ्यों के आधार पर विभाग ने संबंधित विश्वविद्यालयों से डिग्री और शैक्षणिक रिकॉर्ड की जांच कराने की प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है।

24 अभ्यर्थियों ने नियुक्ति वर्ष में ही ली पीजी की डिग्री
रिपोर्ट के मुताबिक, 24 अभ्यर्थियों ने नियुक्ति वर्ष में ही पीजी की डिग्री हासिल की। माध्यमिक आचार्य नियुक्ति की प्रक्रिया वर्ष 2025 में शुरू हुई थी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सफल अभ्यर्थियों में कुछ ऐसे हैं, जिन्होंने नियुक्ति प्रक्रिया शुरू होने वाले वर्ष में ही परीक्षा में शामिल होकर अपनी शैक्षणिक योग्यता हासिल की।
विषयवार अंकों का भी किया गया उल्लेख
रिपोर्ट में कुछ विषयों के सफल अभ्यर्थियों के अंकों का भी उल्लेख है। उदाहरण के तौर पर:
संबंधित विषय में सफल 11 अभ्यर्थियों में 6 के अंक 67 से 68 प्रतिशत के बीच बताए गए हैं।
राजनीति शास्त्र में पीजी करने वाले सफल अभ्यर्थियों में भी इसी तरह के अंकों का उल्लेख किया गया है।
गृह विज्ञान में 13 सफल अभ्यर्थियों में 7 के अंक 66 से 67 प्रतिशत के बीच बताए गए हैं।
कुछ अन्य विषयों में सफल अभ्यर्थियों के अंक 65 से 70 प्रतिशत के बीच बताए गए हैं।
विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी स्थिति
महत्वपूर्ण बात यह है कि डिग्री पर सवाल उठना अपने आप में डिग्री के फर्जी होने का प्रमाण नहीं है। संबंधित विश्वविद्यालयों के रिकॉर्ड, प्रवेश विवरण, परीक्षा रिकॉर्ड और डिग्री की वैधता की आधिकारिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।

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