भारत में मंडरा रहा ‘विनाशकारी’ मौसम का खतरा! वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी, अगले कुछ महीनों में बढ़ सकती है गर्मी और सूखे की मार
नई दिल्ली। भारत में आने वाले महीनों के मौसम को लेकर वैज्ञानिकों ने गंभीर चेतावनी दी है। 180 से अधिक पर्यावरण और मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि वर्ष 2026-27 में अल-नीनो की स्थिति सामान्य प्राकृतिक बदलाव से अलग एक बड़े जलवायु परिवर्तन का संकेत हो सकती है। इसका असर भारत के तापमान, बारिश और सूखे की स्थिति पर पड़ने की आशंका जताई गई है।
अल-नीनो का असर भारत तक सीमित नहीं रहेगा
रिपोर्ट के मुताबिक विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने वर्तमान अल-नीनो की स्थिति आने वाले महीनों में और मजबूत होने की संभावना जताई है। वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी तीव्रता भारत के मौसम और पर्यावरण पर गंभीर प्रभाव डाल सकती है।
अल-नीनो का असर केवल जमीन के तापमान तक सीमित नहीं रहता। इससे समुद्र के तापमान में बदलाव हो सकता है और समुद्री क्षेत्रों में मरीन हीटवेव यानी समुद्री गर्मी की असामान्य स्थिति पैदा हो सकती है।

समुद्र का तापमान बढ़ने से बढ़ेगा खतरा
वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर के सतही जल का तापमान लगातार बढ़ रहा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि अगस्त में यह सामान्य से करीब 2.6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। दावा है कि पिछली एक हजार वर्षों की तुलना में समुद्र के तापमान में यह सबसे बड़ा अंतर हो सकता है।
समुद्र के तापमान में इस तरह की वृद्धि का असर समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ सकता है। इससे समुद्री जीवों और मछलियों की कई प्रजातियों के लिए परिस्थितियां मुश्किल हो सकती हैं।

किसानों और खाद्य सुरक्षा पर भी असर
भारत जैसे कृषि-प्रधान देश में मौसम में बड़ा बदलाव सीधे खेती पर असर डाल सकता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक अल-नीनो के कारण भयंकर सूखा और रिकॉर्ड गर्मी की स्थिति बन सकती है।
बारिश के पैटर्न में बदलाव होने पर किसानों की फसल प्रभावित हो सकती है। इसका असर पशुपालकों और खाद्य आपूर्ति पर भी पड़ने की आशंका है।

जंगलों में आग और पेड़ों के सूखने का खतरा
बढ़ते तापमान के साथ सूखे की स्थिति गंभीर होने पर जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। वैज्ञानिकों ने पेड़ों के बड़े पैमाने पर सूखने की आशंका भी जताई है।
ऐसी परिस्थितियां जैव विविधता और प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के लिए चुनौती पैदा कर सकती हैं।
शहरों में भी बढ़ेगी परेशानी
मौसम में होने वाले इन बदलावों का असर केवल ग्रामीण क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहेगा। रिपोर्ट के मुताबिक शहरों में भी गर्मी का प्रभाव बढ़ सकता है।
खासकर कंक्रीट और सड़कों से घिरे शहरी इलाकों में तापमान आसपास के क्षेत्रों की तुलना में अधिक महसूस हो सकता है। लंबे समय तक चलने वाली तेज गर्मी लोगों के स्वास्थ्य और शहरों की बुनियादी सुविधाओं के लिए चुनौती बन सकती है।
वैज्ञानिकों की मांग—निगरानी और तैयारी मजबूत हो
वैज्ञानिकों ने अल-नीनो और उससे जुड़े जलवायु बदलावों की निगरानी मजबूत करने की जरूरत बताई है। उनका कहना है कि शोध और निगरानी के प्रयासों को मजबूत और विस्तारित किया जाना चाहिए, ताकि चरम मौसम की घटनाओं और उनसे जुड़े सामाजिक प्रभावों को बेहतर तरीके से समझा जा सके।

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