मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगी यूजी-पीजी सीटें, फैकल्टी और स्टाफ का होगा पुनर्गठन

रांची: राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में यूजी और पीजी की सीटें बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है। सीटों में वृद्धि के साथ मेडिकल कॉलेजों में फैकल्टी, डॉक्टर, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ के पदों का भी पुनर्गठन किया जाएगा। इसके लिए सभी राजकीय मेडिकल कॉलेजों को वर्तमान मानव संसाधन और भविष्य की जरूरतों का आकलन कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।

गुरुवार को स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राजकीय मेडिकल कॉलेजों की समीक्षा की गई। बैठक में विशेष सचिव डॉ. नेहा अरोड़ा, संयुक्त सचिव ललित मोहन शुक्ला, मेडिकल एजुकेशन निदेशक डॉ. पी. भट्टाचार्य समेत विभिन्न मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्य और अधीक्षक शामिल हुए।

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों के विस्तार के लिए सिविल वर्क के साथ पर्याप्त मानव संसाधन भी जरूरी है। उन्होंने सभी संस्थानों में डॉक्टर, फैकल्टी, नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ की वर्तमान स्थिति तथा अगले तीन वर्षों की आवश्यकता का विस्तृत आकलन करने का निर्देश दिया। साथ ही अधिकतम यूजी और पीजी सीट बढ़ाने के लिए कार्ययोजना तैयार करने को कहा।

फैकल्टी की कमी को दूर करने के लिए आवश्यकता के अनुसार संविदा पर प्रोफेसरों की नियुक्ति करने की बात कही गई। इसके अलावा सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं लेने और दूसरे राज्यों व शहरों से योग्य प्रोफेसरों को बुलाने की संभावनाएं तलाशने का निर्देश दिया गया। इसके लिए व्यापक प्रचार-प्रसार के साथ नियमित रूप से वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित करने को भी कहा गया।

बैठक में एसएनएमएमसीएच धनबाद की ओर से वर्ष 2030 तक की कार्ययोजना प्रस्तुत की गई। इसमें यूजी की 250 और पीजी की 200 सीट बढ़ाने का प्रस्तावित लक्ष्य शामिल है। इसके अनुरूप सभी शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों को रिस्ट्रक्चर करने का निर्देश दिया गया।

दुमका, हजारीबाग और पलामू समेत अन्य मेडिकल कॉलेजों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को यूजी में 200 और पीजी में 150 सीट तक बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार करने को कहा गया। इसके लिए आवश्यक फैकल्टी, पैरामेडिकल स्टाफ और इंफ्रास्ट्रक्चर की उपलब्धता का भी आकलन करने का निर्देश दिया गया।

बैठक में बोकारो और चाईबासा में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि दोनों मेडिकल कॉलेजों के भवन अगले वर्ष तक तैयार होने की संभावना है। अपर मुख्य सचिव ने कहा कि यदि आवश्यक फैकल्टी और अन्य संसाधन समय पर उपलब्ध हो जाते हैं और निर्धारित मानक पूरे होते हैं, तो अगले वर्ष से दोनों संस्थानों में पढ़ाई शुरू करने की दिशा में प्रयास किया जा सकता है।

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