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विश्व हृदय दिवस: अर्जुन की छाल में छिपा दिल का सहारा, सिमडेगा में भरपूर उपलब्धता

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सिमडेगा: 29 सितंबर को विश्व हृदय दिवस के अवसर पर हृदय को स्वस्थ रखने के प्राकृतिक उपायों की चर्चा के बीच सिमडेगा में आसानी से उपलब्ध अर्जुन के पेड़ की छाल भी ध्यान आकर्षित करती है। अर्जुन (Terminalia arjuna) की छाल का आयुर्वेद में लंबे समय से हृदय स्वास्थ्य से जुड़े उपचारों में उपयोग होता रहा है। हालिया वैज्ञानिक शोधों में भी इसके संभावित हृदय-रक्षक प्रभावों का अध्ययन किया गया है।

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2026 में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में अर्जुन की छाल से संबंधित नौ अध्ययनों और 537 मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। अध्ययन में बाएं वेंट्रिकल की मांसपेशी के भार में औसतन 44.32 यूनिट की कमी और HDL यानी अच्छे कोलेस्ट्रॉल में 3.53 यूनिट की बढ़ोतरी पाई गई। हालांकि हृदय की पंपिंग क्षमता यानी LVEF में सुधार सांख्यिकीय रूप से महत्वपूर्ण नहीं था। शोधकर्ताओं ने भी बड़े और उच्च गुणवत्ता वाले अध्ययनों की जरूरत बताई है।

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वनबहुल सिमडेगा जिले के ग्रामीण और वन क्षेत्रों में अर्जुन के पेड़ आसानी से देखे जा सकते हैं। गिलोय की बेल भी यहां प्राकृतिक रूप से मिलती है और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इसका उपयोग किया जाता रहा है। हालांकि किसी भी जड़ी-बूटी या वनौषधि का सेवन बिना चिकित्सकीय सलाह के करना उचित नहीं है। खासकर हृदय रोग से पीड़ित मरीज अपनी नियमित दवाएं बंद कर किसी वनौषधि को उसका विकल्प न बनाएं।

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विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार 2022 में दुनिया में करीब 1.98 करोड़ लोगों की मौत हृदय एवं रक्तवाहिका संबंधी रोगों से हुई, जो वैश्विक मौतों का लगभग 32 प्रतिशत है। इनमें 85 प्रतिशत मौतें हार्ट अटैक और स्ट्रोक के कारण हुईं।

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WHO के अनुसार तंबाकू का सेवन, अस्वास्थ्यकर भोजन, शारीरिक निष्क्रियता और अधिक नमक सहित अन्य जोखिम कारक हृदय रोग का खतरा बढ़ाते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, नमक का सीमित सेवन, तंबाकू से दूरी और समय पर स्वास्थ्य जांच हृदय रोग के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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अर्जुन की छाल से जुड़े शोध उत्साहजनक संकेत देते हैं, लेकिन उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के आधार पर इसे हृदय रोग की नियमित दवा का विकल्प नहीं माना जा सकता। हृदय संबंधी बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर या कोलेस्ट्रॉल की समस्या वाले लोगों को चिकित्सक की सलाह के अनुसार उपचार जारी रखना चाहिए। किसी भी आयुर्वेदिक या हर्बल उत्पाद का इस्तेमाल शुरू करने से पहले डॉक्टर से परामर्श करना जरूरी है।

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शंभू कुमार सिंह

शंभू कुमार सिंह

रिपोर्टर

शंभू कुमार सिंह सिमडेगा के रहने वाले हैं ये 1995 से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत है दैनिक जागरण जिला प्रभारी, भास्कर दैनिक का जिला प्रभारी, सहित की भी चैनल के साथ में अन्य महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में लगातार सक्रिय रहे है । समाचार संकलन विशेष लेख फीचर व अन्य क्षेत्रों में भी विशेष पकड़।