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झारखंड की सांस्कृतिक पहचान ‘मांदर’ को मिला GI टैग

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निर्मल सिंह

गुमला: झारखंड की पारंपरिक वाद्ययंत्र और सांस्कृतिक पहचान मांदर को भौगोलिक संकेतक (GI) पंजीकरण मिल गया है। गुमला से शुरू हुई पहल के राष्ट्रीय स्तर पर दर्ज होने से मांदर बनाने वाले कारीगरों के साथ-साथ झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी नई पहचान मिली है।

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मांदर झारखंड के पर्व-त्योहार, पारंपरिक नृत्य और सामाजिक जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा है। इसके GI पंजीकरण की प्रक्रिया 24 सितंबर 2021 को आवेदन के साथ शुरू हुई थी। इसके बाद 18 अक्टूबर 2021 को औपचारिकता जांच, 30 जून 2022 को अनुपालन जांच तथा 6 मई और 24 जून 2024 को आवश्यक दस्तावेज जमा किए गए। 30 जनवरी 2025 को परीक्षण रिपोर्ट जारी हुई, जिसका जवाब 23 जनवरी 2026 को दिया गया। इसके बाद मांदर को GI पंजीकरण प्राप्त हुआ।

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इस पूरी प्रक्रिया में गुमला जिला प्रशासन और स्थानीय कारीगरों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। तत्कालीन उपायुक्त सुशांत गौरव ने कारीगरों के बीच पहुंचकर मांदर निर्माण की पारंपरिक कला और कौशल को समझा तथा इसके दस्तावेजीकरण की नींव रखी। इसके बाद तत्कालीन उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने तकनीकी प्रक्रिया को गति दी। प्रेरणा दीक्षित ने अनुवर्ती कार्रवाई को आगे बढ़ाया, जबकि वर्तमान उपायुक्त दिलीपेश्वर महतो ने प्रक्रिया की निरंतर निगरानी करते हुए सहयोग दिया।

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जिले के रायडीह प्रखंड के जरजट्टा गांव समेत विभिन्न क्षेत्रों के मांदर कारीगरों की पहचान कर उनके निर्माण कौशल और पारंपरिक पद्धति का दस्तावेजीकरण किया गया। कारीगरों को संगठित करने के उद्देश्य से मांदर किसान उत्पादक कंपनी लिमिटेड का गठन भी किया गया है। कारीगरों के कौशल विकास के लिए जरजट्टा में 40 और पालकोट प्रखंड के टेंगरिया में 20 कारीगरों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं सिसई प्रखंड के लकेया में 20 कारीगरों को अक्टूबर में प्रशिक्षण देने की तैयारी है।

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GI टैग मिलने के बाद मांदर के संरक्षण, कारीगरों के कौशल विकास और इसके लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया जाएगा। जिला उद्यमी समन्वयक सूरज कुमार और लघु-कुटीर उद्यम विकास बोर्ड की टीम ने भी इस पूरी प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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उपायुक्त दिलीपेश्वर महतो ने मांदर को GI पंजीकरण मिलने पर जिले के सभी कारीगरों और संबंधित टीम को बधाई दी। उन्होंने कहा कि अब मांदर की पारंपरिक कला के संरक्षण के साथ कारीगरों के कौशल विकास और उत्पाद के लिए बाजार उपलब्धता को और मजबूत किया जाएगा।

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Drishti Now Desk

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