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दर्द पर भारी पड़ीं खुशियाँ: जब रांची में कैंसर पीड़ितों की ज़िंदगी में डांडिया के ताल पर बिखरीं मुस्कान

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रांची, कैंसर… एक ऐसा शब्द जो सुनते ही किसी के भी कदम डगमगा जाते हैं। कीमोथेरेपी का दर्द, गिरते बाल, और हर पल डिप्रेशन से होती लड़ाई। लेकिन रांची के फिरायालाल बैंक्वेट में गुरुवार को जब डांडिया के ढोल और संगीत की थाप गूंजी, तो इस दर्द पर उम्मीद और खुशियों की जीत साफ़ नज़र आई।

संजीवनी सखी ग्रुप द्वारा आयोजित डांडिया उत्सव 2026 में जहाँ 250 से अधिक महिलाओं ने अपनी संस्कृति और नृत्य का जलवा बिखेरा, वहीं इस आयोजन की असली आत्मा बने वे 70 कैंसर पीड़ित मरीज, जो अपने जिंदगी के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं।

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“हम दवा नहीं, चेहरे की मुस्कान लौटाते हैं”

संजीवनी सखी ग्रुप की संस्थापिका पूनम बाला ने बताया कि वे लंबे समय से करीब 70 कैंसर मरीजों को एक नया जीवन और जीने की उम्मीद देने की कोशिश कर रही हैं। इन मरीजों की पहचान और गोपनीयता का ध्यान रखते हुए उनके नाम गुप्त रखे गए हैं।

पूनम बाला ने भावुक होते हुए कहा:

“हम इन मरीजों के लिए कोई बड़ा डॉक्टरी इलाज या भौतिक सामान नहीं जुटाते। हम बस उन्हें खुशियाँ देते हैं। कैंसर जैसी बीमारी इंसान को शारीरिक रूप से कम और मानसिक रूप से ज्यादा तोड़ती है। जब वे हमारे यहाँ आते हैं, साथ बैठकर डांस देखते हैं, हँसते हैं और कॉमेडी का लुत्फ उठाते हैं, तो कुछ पलों के लिए वे अपना सारा दर्द भूल जाते हैं। हमारा मानना है कि अगर मन खुश रहे, तो इंसान की आधी बीमारी वैसे ही खत्म हो जाती है।”

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डांडिया के रंगों में छुपा अपनों का साथ

इस डांडिया उत्सव में भी ये मरीज गुमनामी के पर्दे के पीछे बैठकर पूरे कार्यक्रम का हिस्सा बने। जब रितिका साहू की शिव तांडव और दुर्गा प्रस्तुति ने बैंक्वेट हॉल को ऊर्जा से भर दिया, तब इन मरीजों की आँखों में भी जिंदगी जीने की एक नई चमक देखी गई।
समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं रांची की मेयर रोशनी खलखो, डिप्टी मेयर नीरज कुमार, भाजपा जिला अध्यक्ष वरुण कुमार साहू और अन्य गणमान्य अतिथियों ने भी इस मानवीय पहल की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

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जिंदगी से हार न मानने का संदेश

संजीवनी सखी ग्रुप का यह प्रयास समाज को यह संदेश देता है कि गंभीर से गंभीर बीमारी में भी इंसान को केवल दवा की नहीं, बल्कि अपनों के प्यार, साथ और हँसी की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। डांडिया की ताल पर गूंजती हँसी ने यह साबित कर दिया कि खुशियों के आगे कैंसर जैसा रोग भी घुटने टेकने पर मजबूर हो जाता है।

 

 

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नवीन कुमार

नवीन कुमार

Editor In Chief

नवीन कुमार को पिछले 30 वर्षों से भी अधिक समय से प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का अनुभव रहा है...इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में बड़े पद पर कार्यरत रहे हैं...नक्सल, क्राइम, खेल, राजनीति,बिज्ञान एवं तकनीकी, पर्यावरण के साथ ही समसामयिक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विषयों पर मजबूत पकड़ रही है। खाली समय में उन्हें नई जगहों पर घूमना और फोटोग्राफी करना पसंद है।