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झारखंड स्थापना दिवस को JMM का ‘महिमामंडन समारोह’ बनाने का आरोप, आजसू पार्टी ने साधा निशाना

रांची : आजसू पार्टी ने झारखंड राज्य स्थापना दिवस समारोह पर तीखा हमला बोला है। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने 25वें स्थापना दिवस को पूरी तरह से झामुमो (JMM) का व्यक्तिगत महिमामंडन समारोह बना दिया और झारखंड आंदोलन के अन्य प्रमुख योद्धाओं व संगठनों की भूमिका को जानबूझकर नजरअंदाज कर दिया।

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आजसू पार्टी के केंद्रीय उपाध्यक्ष एवं वरिष्ठ झारखंड आंदोलनकारी प्रवीण प्रभाकर ने सोमवार को जारी बयान में कहा कि समारोह के सांस्कृतिक कार्यक्रमों से लेकर जारी की गई कॉफी टेबल बुक तक में भगवान बिरसा मुंडा और अन्य शहीदों की जगह सिर्फ शिबू सोरेन व हेमंत सोरेन को ही प्रमुखता दी गई। अन्य मुख्यमंत्रियों का तो जिक्र ही नहीं किया गया। राजधानी रांची के होर्डिंग्स में भी बिरसा मुंडा गायब थे और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तस्वीरें ही छाई रहीं।

प्रवीण प्रभाकर ने सवाल उठाया कि झामुमो को यह भी बताना चाहिए कि जब वह लंबे समय तक कांग्रेस-राजद के साथ यूपीए गठबंधन में थी, तब अलग झारखंड राज्य क्यों नहीं बना? 1993 में झामुमो के चार सांसदों के समर्थन से कांग्रेस प्रधानमंत्री नरसिंह राव की सरकार बची थी, उस समय अलग राज्य की मांग क्यों नहीं उठाई गई? 1992 में लालू प्रसाद यादव की सरकार को भी झामुमो का समर्थन था, तब भी अलग राज्य का प्रस्ताव क्यों नहीं आया?

उन्होंने याद दिलाया कि आजसू पार्टी के उग्र आंदोलन के दबाव में ही 1989 में कांग्रेस की राजीव गांधी सरकार और 1999 में भाजपा की अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने आजसू नेताओं से वार्ता की थी, जिसके परिणामस्वरूप झारखंड राज्य का गठन और ‘झारखंड’ नामकरण संभव हो सका। आजसू, झारखंड पार्टी जैसे आंदोलनकारी संगठनों की भूमिका को पूरी तरह दरकिनार करना ऐतिहासिक तथ्यों का अपमान है।

आजसू नेता ने कहा, “शिबू सोरेन (गुरुजी) की भूमिका से इनकार नहीं किया जा सकता, लेकिन झारखंड अलग राज्य का सपना सिर्फ एक व्यक्ति या एक दल का नहीं था। इसे एकतरफा महिमामंडन का मंच बनाना दुर्भाग्यपूर्ण है।”

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