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भारत पर अमेरिका का 50% टैरिफ लागू, निर्यात क्षेत्र पर पड़ेगा भारी असर

अमेरिका ने भारत से आयातित सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू करने की घोषणा की है, जो आज, 27 अगस्त 2025 से प्रभावी हो गया है। यह टैरिफ मौजूदा 25 प्रतिशत टैरिफ के अतिरिक्त 25 प्रतिशत शुल्क के साथ लागू किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कदम का कारण भारत द्वारा रूस से तेल खरीद को बताया है, जिसे व्हाइट हाउस ने यूक्रेन युद्ध में रूस की आर्थिक मदद के रूप में देखा है।

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विशेषज्ञों के अनुसार, इस टैरिफ से भारत के 86.5 अरब डॉलर के निर्यात में से लगभग 66 प्रतिशत, यानी 60.2 अरब डॉलर के सामानों पर असर पड़ेगा। सबसे ज्यादा प्रभावित होने वाले क्षेत्रों में टेक्सटाइल और परिधान में 10.8 अरब डॉलर के निर्यात पर 63.9% तक टैरिफ का बोझ। रत्न और आभूषण विशेष रूप से हीरे और सोने से जुड़े उत्पाद। समुद्री उत्पाद 2.4 अरब डॉलर के झींगा निर्यात पर 60% तक टैरिफ, ऑर्गेनिक केमिकल्स पर 2.7 अरब डॉलर के निर्यात पर 50% टैरिफ। और मशीनरी और वाहन पर 6.7 अरब डॉलर के निर्यात पर असर पड़ेगा।

हालांकि, फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर्स, और ऊर्जा संसाधनों जैसे कुछ क्षेत्रों को इस टैरिफ से छूट दी गई है। इसके अलावा, 27 अगस्त से पहले जहाज पर लोड हो चुके और 17 सितंबर 2025 तक अमेरिका पहुंचने वाले सामानों पर अतिरिक्त टैरिफ नहीं लगेगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस टैरिफ को “आर्थिक दबाव” करार देते हुए कहा कि भारत अपने हितों की रक्षा के लिए हर चुनौती का सामना करेगा। उन्होंने अहमदाबाद में एक सभा में कहा, “मोदी के लिए किसानों, पशुपालकों और छोटे उद्योगों के हित सबसे ऊपर हैं। हम किसी भी दबाव के सामने नहीं झुकेंगे।” विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी अमेरिका के इस कदम को “अनुचित” बताया और कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के अनुसार, इस टैरिफ से भारतीय निर्यातकों की अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता कमजोर होगी, जिससे चीन और वियतनाम जैसे देशों को फायदा हो सकता है। भारतीय शेयर बाजार में भी मंगलवार को भारी गिरावट देखी गई, जिसमें सेंसेक्स 849 अंक लुढ़ककर 81,000 से नीचे बंद हुआ।

भारत सरकार ने तत्काल जवाबी टैरिफ लगाने के बजाय कूटनीतिक बातचीत और निर्यात प्रोत्साहन जैसे उपायों पर ध्यान देने का फैसला किया है। वाणिज्य मंत्रालय ने निर्यातकों और एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के साथ बैठकें शुरू कर दी हैं ताकि प्रभाव को कम करने के उपाय खोजे जा सकें।

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