सोगड़ा आश्रम में वार्षिकोत्सव समारोह, 1832 मरीजों की हुई निःशुल्क जांच

जशपुर: छत्तीसगढ़ के जशपुर स्थित ब्रह्मनिष्ठालय शक्रधर ग्राम सोगड़ा आश्रम में परमपूज्य अघोरेश्वर महाविभूति स्थल पर चरणपादुका, शिवलिंग एवं प्रतिमा स्थापना का 31वां वार्षिकोत्सव समारोह आयोजित किया गया। दो दिवसीय समारोह के दौरान गोष्ठी, अखंड संकीर्तन, निःशुल्क चिकित्सा शिविर और जरूरतमंदों के बीच वस्त्र एवं कंबल वितरण जैसे कार्यक्रम हुए। चिकित्सा शिविर में लगभग 1832 मरीजों की विशेषज्ञ चिकित्सकों ने जांच की और उन्हें निःशुल्क दवाएं दी गईं।
गोष्ठी में बाबा भगवान राम ट्रस्ट के अध्यक्ष पूज्यपाद बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सत्संग में महापुरुषों की वाणी सुनना तभी सार्थक है, जब उसे जीवन में अपनाया जाए। मनुष्य जीवन को देवदुर्लभ बताते हुए उन्होंने कहा कि सांसारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए आत्मकल्याण के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि धन, पद और प्रतिष्ठा की असीमित लालसा मनुष्य को असंतुष्ट बनाए रखती है। जीवन में उन्नति के साथ संतोष, विनम्रता और परोपकार भी जरूरी हैं। सभी प्राणियों में एक ही महाप्राण का अंश विद्यमान है, इसलिए दूसरों की सेवा और सहायता करना आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
पूज्य गुरुदेव ने सुख-दुःख को जीवन का स्वाभाविक हिस्सा बताते हुए कठिन परिस्थितियों में धैर्य और मानसिक संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि धन, विद्या और ज्ञान का अहंकार आध्यात्मिक उन्नति में बाधक है। ध्यान-साधना के लिए मन की स्थिरता, धैर्य, आत्मनिरीक्षण और निरंतर अभ्यास आवश्यक हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गुरु मार्गदर्शन कर सकते हैं, लेकिन लक्ष्य तक पहुंचने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं प्रयास करना पड़ता है।
वार्षिकोत्सव के अवसर पर आयोजित चिकित्सा शिविर में विभिन्न राज्यों से आए सर्वेश्वरी समूह के 27 विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सेवाएं दीं। शिविर में जनरल फिजिशियन, दंत रोग, हृदय रोग, महिला एवं बाल रोग, नेत्र चिकित्सा, सर्जरी, आयुर्वेद, होम्योपैथी, फिजियोथेरेपी, एक्यूप्रेशर और एक्यूपंक्चर सहित विभिन्न चिकित्सा पद्धतियों के विशेषज्ञ शामिल हुए। मरीजों की जांच के साथ रक्त शर्करा, मलेरिया और टाइफाइड की जांच की निःशुल्क व्यवस्था भी की गई।
कार्यक्रम की शुरुआत सुबह श्रमदान एवं सफाई के बाद परमपूज्य अघोरेश्वर महाविभूति स्थल पर महाप्रभु की चरणपादुका, शिवलिंग एवं प्रतिमा के पूजन और आरती से हुई। इसके साथ 26 अक्टूबर से चल रहे ‘अघोरन्ना परो मंत्र: नास्ति तत्वं गुरो: परम्’ अखंड संकीर्तन का समापन किया गया। इसके बाद श्री पृथ्वीपाल जी ने सफलयोनि का पाठ किया और रांची शाखा के युवा सैनिकों ने मंगलाचरण प्रस्तुत किया।
गोष्ठी में उदय नारायण पाण्डेय, सर्वेश्वर नाथ नामदेव, तेजबल सिंह और डॉ. आशुतोष त्रिपाठी सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे। समारोह के दौरान जरूरतमंद वनवासी महिलाओं, पुरुषों, बच्चों और बुजुर्गों के बीच स्वच्छ वस्त्र एवं कंबल वितरित किए गए। अंत में बाबा औघड़ गुरुपद संभव राम जी ने सभी के जीवन में सद्बुद्धि, विवेक, करुणा, प्रेम, मैत्री और भाईचारे की भावना विकसित होने की कामना की।

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