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झारखंड: बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल से की मुलाकात, शराब घोटाले और ACB की कार्यशैली की CBI जांच की मांग

झारखंड: बाबूलाल मरांडी ने राज्यपाल से की मुलाकात, शराब घोटाले और ACB की कार्यशैली की CBI जांच की मांग

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रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आज राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने राज्य में हुए चर्चित शराब घोटाले और इसकी जांच कर रही एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) की भूमिका पर गंभीर सवाल उठाए। मरांडी ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपकर मांग की है कि शराब घोटाले के साथ-साथ ACB की कार्यप्रणाली की भी जांच CBI से कराई जाए।

विनय चौबे को बचाने के लिए ACB ने जानबूझकर नहीं दाखिल की चार्जशीट

राजभवन से निकलने के बाद बाबूलाल मरांडी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की, जिसमें उन्होंने राज्य सरकार और जांच एजेंसी पर तीखे हमले किए। उन्होंने कहा कि आईएएस अधिकारी विनय चौबे पर आय से अधिक संपत्ति और शराब घोटाले के गंभीर आरोप हैं, लेकिन ACB उनके खिलाफ समय पर चार्जशीट दाखिल करने में विफल रही।

मरांडी ने आरोप लगाया, “ACB ने विनय चौबे के पूरे परिवार की संपत्ति खंगाली, लोगों को महाराष्ट्र और गुजरात से गिरफ्तार कर लाया गया, लेकिन अंत में क्या हुआ? जानबूझकर समय पर चार्जशीट दाखिल नहीं की गई ताकि उन्हें ‘डिफ़ॉल्ट बेल’ मिल सके। यह सब एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया गया है।”

ACB की कार्यशैली पर उठाए गंभीर सवाल

नेता प्रतिपक्ष ने ACB को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि यह एजेंसी अब भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के बजाय राजनीतिक हथियार बन गई है। उन्होंने इसके कामकाज पर निम्नलिखित आरोप लगाए:
भयादोहन और उगाही: एजेंसी का इस्तेमाल लोगों को डराने और अवैध उगाही के लिए किया जा रहा है।
विरोधियों को प्रताड़ित करना: राजनैतिक और गैर-राजनैतिक विरोधियों को मानसिक यातना देने के लिए इसका दुरुपयोग हो रहा है।
सबूतों को नष्ट करना: शराब घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को मिटाने में एजेंसी की भूमिका संदिग्ध है।
“गिरफ्तारी सजा देने के लिए नहीं, बल्कि बड़ी मछलियों को बचाने के लिए थी”
मरांडी ने पिछले साल हुई विनय चौबे की गिरफ्तारी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने उसी दिन स्पष्ट कर दिया था कि यह कार्रवाई केवल दिखावा है। उन्होंने कहा, “पिछले 10-11 महीनों से ACB केवल दिखावा कर रही है ताकि ED और CBI की आंखों में धूल झोंकी जा सके। असल मकसद इस घोटाले की ‘बड़ी मछलियों’ को कानून के शिकंजे से बचाना है।”

क्या है मामला?

झारखंड में नई उत्पाद नीति लागू होने के बाद करोड़ों रुपये के राजस्व घाटे और अवैध कमीशनखोरी का आरोप लगा है। इस मामले की जांच के घेरे में कई बड़े नौकरशाह और राजनेता हैं। बाबूलाल मरांडी के इन ताजा आरोपों ने राज्य की सियासत में एक बार फिर भूचाल ला दिया है। अब देखना यह होगा कि राजभवन इस मामले में क्या संज्ञान लेता है।

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