भाजपा कार्यसमिति में हेमंत सरकार के खिलाफ राजनीतिक प्रस्ताव पारित, भ्रष्टाचार-बेरोजगारी पर उठाए सवाल

रांची: झारखंड भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की बैठक के दूसरे दिन हेमंत सोरेन सरकार के खिलाफ राजनीतिक प्रस्ताव-2 सर्वसम्मति से पारित किया गया। सुकुरहुट्टू स्थित हवेली बैंक्वेट हॉल में आयोजित बैठक के चतुर्थ सत्र में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने प्रस्ताव पेश किया। पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन, मधु कोड़ा, विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी और मंजू कुमारी ने इसका अनुमोदन किया। प्रस्ताव में राज्य सरकार पर वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, बिगड़ती कानून-व्यवस्था और आदिवासियों के हितों की अनदेखी के आरोप लगाए गए। भाजपा ने इन मुद्दों को लेकर राज्यव्यापी जनजागरण और लोकतांत्रिक संघर्ष तेज करने का संकल्प लिया।
प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू की अध्यक्षता में हुई बैठक में भाजपा ने झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार के कामकाज पर सवाल उठाए। राजनीतिक प्रस्ताव में आरोप लगाया गया कि वर्ष 2019 से सत्ता में काबिज सरकार ने रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली, पेयजल और सिंचाई जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर किए गए वादे पूरे नहीं किए। पार्टी ने भर्ती परीक्षाओं में अनियमितता, युवाओं के भविष्य, किसानों की समस्याओं, पेंशन, छात्रवृत्ति और विस्थापितों को न्याय नहीं मिलने जैसे मुद्दों को भी उठाया।
प्रस्ताव पेश करते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राजनीतिक दल अपने प्रस्ताव के माध्यम से जनता के बीच अपनी बात रखते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस और झामुमो ने जल, जंगल और जमीन की बात तो की, लेकिन आदिवासी महापुरुषों को सम्मान देने और उनके हितों की रक्षा करने में विफल रहे। उन्होंने बिरसा मुंडा को सम्मान देने, जनजातीय गौरव दिवस की शुरुआत और झारखंड राज्य के गठन का श्रेय भाजपा की सरकारों को दिया।
मरांडी ने हेमंत सरकार पर आदिवासियों की जमीन की लूट, विकास कार्यों में ठहराव और भ्रष्टाचार बढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि राज्य में विकास योजनाओं का अपेक्षित क्रियान्वयन नहीं हो रहा है और जनता सरकार के कामकाज से निराश है। उन्होंने खनिज संपदा, कोयले के अवैध कारोबार और खनन से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार को घेरा।
उन्होंने राज्य की बदलती जनसांख्यिकी पर चिंता जताते हुए घुसपैठ का मुद्दा उठाया। साथ ही पिछड़ा वर्ग आयोग से संबंधित ट्रिपल टेस्ट की प्रक्रिया पूरी कराकर त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराने की मांग की। मरांडी ने कार्यकर्ताओं से सरकार की नीतियों के खिलाफ गांव-गांव तक आवाज उठाने का आह्वान किया।
पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने प्रस्ताव का समर्थन करते हुए राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और योजनाओं के क्रियान्वयन में अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि सरकार की कार्यशैली से आम जनता परेशान है। उन्होंने वृद्धजनों और विधवाओं की पेंशन, अबुआ आवास, हरा राशन कार्ड, प्राथमिक शिक्षा और अंचल कार्यालयों में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने आदिवासियों की जमीन और विस्थापितों की समस्याओं पर भी सरकार को घेरा।
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा ने कहा कि राज्य सरकार के कार्यकाल में लोकतंत्र को लूटतंत्र में बदलने का आरोप राजनीतिक प्रस्ताव में प्रमुखता से उठाया गया है। उन्होंने छात्रों के मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि भाजपा ने उनके समर्थन में आवाज उठाई है। विधायक सत्येंद्र नाथ तिवारी और मंजू कुमारी ने भी प्रस्ताव का समर्थन करते हुए राज्य सरकार की नीतियों की आलोचना की।
राजनीतिक प्रस्ताव में भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार के रोजगार संबंधी वादे पूरे नहीं हुए हैं। पार्टी ने पांच लाख नौकरी प्रतिवर्ष, बेरोजगारी भत्ता, सरकारी नौकरी, ओबीसी को 27 प्रतिशत आरक्षण, किसानों को 3,200 रुपये प्रति क्विंटल धान का समर्थन मूल्य और महिलाओं को सम्मान राशि देने जैसे वादों का उल्लेख किया।
प्रस्ताव में राज्य की कानून-व्यवस्था पर चिंता जताते हुए अपराध, गोलीबारी और लूट की घटनाओं को लेकर सरकार की जवाबदेही तय करने की मांग की गई। भाजपा ने खनिज संपदा के उपयोग, सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता, बजट खर्च, निवेश और रोजगार सृजन को लेकर भी सवाल उठाए। पार्टी ने युवाओं और छात्रों की समस्याओं, पलायन तथा मानव तस्करी को गंभीर चिंता का विषय बताया।
प्रस्ताव में ‘अबुआ सरकार से ठगुआ सरकार’, भ्रष्टाचार, आदिवासी हितों, घुसपैठ, बदलती जनसांख्यिकी और खनन से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से शामिल किया गया। ये आरोप और मुद्दे भाजपा के राजनीतिक प्रस्ताव का हिस्सा हैं।
भाजपा प्रदेश कार्यसमिति ने संकल्प लिया कि हेमंत सोरेन सरकार की कथित वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को लेकर राज्यव्यापी जनजागरण अभियान चलाया जाएगा। पार्टी कार्यकर्ता गांव-गांव और घर-घर जाकर जनता के बीच इन मुद्दों को उठाएंगे। भाजपा ने युवाओं, छात्रों, किसानों, महिलाओं, आदिवासियों और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष तेज करने की बात कही।
इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, बाबूलाल मरांडी, राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सौदान सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा, रघुवर दास, चंपई सोरेन और मधु कोड़ा, प्रदेश प्रभारी गजेंद्र सिंह पटेल, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश समेत पार्टी के सांसद, विधायक, प्रदेश पदाधिकारी, जिलाध्यक्ष और कार्यसमिति के सदस्य मौजूद रहे।

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