केंद्र सरकार संसद में पेश करेगी तीन अहम विधेयक: गंभीर आपराधिक आरोपों में PM, CM और मंत्रियों को हटाने का प्रावधान

केंद्र सरकार संसद में पेश करेगी तीन अहम विधेयक: गंभीर आपराधिक आरोपों में PM, CM और मंत्रियों को हटाने का प्रावधान

नई दिल्ली : केंद्र सरकार आज (बुधवार) लोकसभा में तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है, जिनका उद्देश्य गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तारी या हिरासत की स्थिति में प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को पद से हटाने के लिए कानूनी ढांचा तैयार करना है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इन विधेयकों को पेश करेंगे, जिन्हें संसद की संयुक्त समिति को विचार के लिए भेजे जाने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा।

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इन विधेयकों में शामिल हैं:  

1. संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025: 

यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239AA में संशोधन करेगा, ताकि गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यों और दिल्ली के मुख्यमंत्री या मंत्रियों को पद से हटाने का प्रावधान किया जा सके। मौजूदा संविधान में ऐसे मामलों के लिए कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं है।

2. केंद्र शासित प्रदेश सरकार (संशोधन) विधेयक, 2025: 

यह विधेयक केंद्र शासित प्रदेश अधिनियम, 1963 की धारा 45 में संशोधन करेगा, ताकि गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार मुख्यमंत्री या मंत्रियों को हटाने का प्रावधान जोड़ा जा सके।

3. जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025: 

यह विधेयक जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम, 2019 की धारा 54 में संशोधन करेगा, जिसमें गंभीर आपराधिक मामलों में गिरफ्तार मुख्यमंत्री या मंत्रियों को पद से हटाने की व्यवस्था शामिल होगी।

क्या है प्रावधान

प्रस्तावित विधेयकों के तहत, यदि प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, मुख्यमंत्री या कोई अन्य मंत्री गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार होता है, जिसमें कम से कम पांच साल की सजा का प्रावधान हो, और उसे लगातार 30 दिनों तक हिरासत में रखा जाता है, तो 31वें दिन उसे स्वतः पद से हटा दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि यह कदम राजनीति में स्वच्छता, जवाबदेही और नैतिक आचरण को बढ़ावा देने के लिए उठाया जा रहा है।

विपक्ष का विरोध

कांग्रेस सहित विपक्षी दलों ने इन विधेयकों पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने इसे विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने की साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक पक्षपाती केंद्रीय एजेंसियों के दुरुपयोग से विपक्षी मुख्यमंत्रियों को अस्थिर करने का प्रयास है। वहीं, लोकसभा में कांग्रेस के उप नेता गौरव गोगोई ने दावा किया कि यह विधेयक राहुल गांधी की ‘वोट अधिकार यात्रा’ से ध्यान भटकाने की रणनीति है।

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