Paper leak case is a national-level issue; will speak to the Union Home Minister if needed: Hemant Soren.

बड़गाईं की 8.86 एकड़ जमीन मामले में हेमंत सोरेन पर आरोप गठित, 17 आरोपियों को करना होगा ट्रायल फेस

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रांची। बड़गाईं अंचल की 8.86 एकड़ जमीन से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रांची की विशेष पीएमएलए अदालत ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन समेत मामले के 17 आरोपियों के खिलाफ आरोप गठित कर दिया है। अब सभी आरोपियों को मामले में ट्रायल फेस करना होगा।सुनवाई के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश हुए। अदालत ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को पढ़कर सुनाया। हेमंत सोरेन ने कोर्ट में अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को निराधार बताया और आरोपों से इनकार किया।

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मामला रांची के बड़गाईं अंचल की करीब 8.86 एकड़ जमीन से जुड़ा है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि जमीन की कथित अवैध तरीके से खरीद-बिक्री, सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर और फर्जी दस्तावेजों के जरिए संपत्ति हासिल करने की प्रक्रिया में मनी लॉन्ड्रिंग हुई। इस मामले में हेमंत सोरेन को छोड़कर 16 अन्य आरोपियों के खिलाफ पहले ही आरोप गठित किए जा चुके थे। हेमंत सोरेन के खिलाफ आरोप गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब मामले में ट्रायल की राह आगे बढ़ेगी। इससे पहले 24 सितंबर को हुई सुनवाई में हेमंत सोरेन वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत में पेश हुए थे और ED की ओर से उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के अध्ययन के लिए समय मांगा था। इसके बाद अदालत ने अगली सुनवाई के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की थी।

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मामले की जांच के दौरान ED ने बड़गाईं अंचल में जमीन के कथित अवैध अधिग्रहण और सरकारी रिकॉर्ड में हेरफेर से जुड़े कई दस्तावेजों और बयानों को अपनी जांच का आधार बनाया है। झारखंड हाईकोर्ट में भी हेमंत सोरेन ने निचली अदालत की कार्यवाही को चुनौती दी है।

आप समझे क्या होता है आरोप गठित होने के बाद?

आरोप गठित होना मुकदमे का फैसला नहीं है। बल्कि इसका मतलब है कि अदालत ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर आरोपी के खिलाफ मुकदमा आगे चलाने के लिए आरोप औपचारिक रूप से तय किए हैं। इसके बाद मामले में अभियोजन पक्ष के साक्ष्य, गवाहों की गवाही, जिरह और बचाव पक्ष की दलीलों सहित ट्रायल की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। अंतिम दोषसिद्धि या बरी किए जाने का फैसला ट्रायल के बाद अदालत द्वारा किया जाएगा।

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