Defence Sector: Successful 'Salvo' Test of Indigenous Anti-Ship Missile NASM-SR

रक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग: हेलीकॉप्टर से दागी गईं एंटी- शिप मिसाइलें!

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रक्षा क्षेत्र में भारत की बड़ी छलांग: हेलीकॉप्टर से दागी गईं एंटी- शिप मिसाइलें! NASM-SR का सफल ‘सैल्वो’ परीक्षण

Defence Sector: Successful 'Salvo' Test of Indigenous Anti-Ship Missile NASM-SR

नई दिल्ली/भुवनेश्वर:  भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) और भारतीय नौसेना ने गुरुवार को ओडिशा तट के पास समुद्र में स्वदेशी *नेवल शॉर्ट रेंज एंटी-शिप मिसाइल (NASM-SR) का पहला सफल ‘सैल्वो’ लॉन्च किया।
इस सफल परीक्षण के साथ ही भारत ने वायु से समुद्र में मार करने वाली अपनी पहली स्वदेशी मिसाइल तकनीक की ताकत का प्रदर्शन कर ‘आत्मनिर्भर भारत’ की संकल्पना को और मजबूत किया है।

क्या है ‘सैल्वो’ लॉन्च और क्यों है यह खास?

परीक्षण के दौरान भारतीय नौसेना के Sea King Mk.42B हेलीकॉप्टर से दो मिसाइलें एक के बाद एक (सैल्वो मोड) दागी गईं। यह परीक्षण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि युद्ध की स्थिति में एक साथ कई मिसाइलें दागने से दुश्मन के युद्धपोत का रडार सिस्टम भ्रमित हो जाता है, जिससे हमले की सटीकता और घातक क्षमता बढ़ जाती है।

मिसाइल की 5 बड़ी विशेषताएं:

सटीक मारक क्षमता: मिसाइल ने लक्ष्य के ‘वॉटरलाइन’ (पानी की सतह के पास) पर सटीक हमला किया, जो किसी भी जहाज को डुबोने के लिए सबसे घातक माना जाता है।
सी-स्किमिंग क्षमता:यह मिसाइल समुद्र की लहरों के बिल्कुल करीब (बहुत कम ऊंचाई पर) उड़ान भरती है, जिससे इसे दुश्मन के रडार द्वारा ट्रैक करना लगभग नामुमकिन होता है।
*फायर-एंड-फॉरगेट:अत्याधुनिक स्वायत्त मार्गदर्शन (Autonomous Guidance) तकनीक से लैस इस मिसाइल को दागने के बाद पायलट को इसे गाइड करने की जरूरत नहीं पड़ती।
ऑल-वेदर ऑपरेशन: यह दिन हो या रात और किसी भी मौसम में अपने लक्ष्य को भेदने में सक्षम है।
रेंज: इसकी मारक क्षमता लगभग 55 किलोमीटर है।

भविष्य के आधुनिक हेलीकॉप्टरों में होगी तैनाती

वर्तमान में इस मिसाइल का परीक्षण ‘सी किंग’ हेलीकॉप्टर से किया जा रहा है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले समय में इसे भारतीय नौसेना के सबसे आधुनिक MH-60R (रोमियो) हेलीकॉप्टरों और स्वदेशी  ALH (Advanced Light Helicopter)  पर भी तैनात किया जाएगा।

रक्षा मंत्री ने दी बधाई

इस सफलता पर खुशी जताते हुए रक्षा मंत्री  राजनाथ सिंह ने DRDO, भारतीय नौसेना और इसमें शामिल निजी उद्योगों व स्टार्टअप्स को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह मिसाइल प्रणाली भारतीय सशस्त्र बलों की सामरिक क्षमता को एक नई ऊंचाई प्रदान करेगी।
यह मिसाइल DRDO की हैदराबाद स्थित प्रयोगशाला रिसर्च सेंटर इमारत’ (RCI)  द्वारा विकसित की गई है, जिसमें भारतीय उद्योग जगत ने विकास-उत्पादन साझेदार के रूप में अहम भूमिका निभाई है।

ब्यूरो रिपोर्ट

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