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झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: झारखंड में अब जंगल के करीब नहीं होगा खनन: हाई कोर्ट ने 250 मीटर वाले नियम पर लगाई रोक

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झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: झारखंड में अब जंगल के करीब नहीं होगा खनन: हाई कोर्ट ने 250 मीटर वाले नियम पर लगाई रोक

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रांची:  झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य में खनन और पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक ऐतिहासिक अंतरिम आदेश सुनाया है। कोर्ट ने जंगलों के समीप स्टोन माइनिंग (पत्थर खनन) और स्टोन क्रशर स्थापित करने की न्यूनतम दूरी घटाने के राज्य सरकार के पुराने फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश के बाद अब पुराने कड़े नियम फिर से बहाल हो गए हैं।

250 मीटर का नियम हुआ निष्प्रभावी

साल 2015 और 2017 में राज्य सरकार और झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) द्वारा जारी अधिसूचना के माध्यम से खनन की दूरी को घटाकर 250 मीटर  कर दिया गया था। हाई कोर्ट ने इस अधिसूचना को फिलहाल प्रभावहीन करते हुए स्पष्ट किया है कि पर्यावरण की सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता।

क्या होंगे अब नए मानक?
कोर्ट के आदेशानुसार, अब खनन और क्रशर इकाइयों के लिए निम्नलिखित दूरियां अनिवार्य होंगी:
स्टोन माइनिंग: जंगल से न्यूनतम  500 मीटर की दूरी।
स्टोन क्रशर:  जंगल से न्यूनतम  400 मीटर की दूरी।
नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ सैंक्चुरी: इनके चारों ओर 1 किलोमीटर  का ‘नो माइनिंग जोन’ बरकरार रहेगा (सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार)।

बिना वैज्ञानिक आधार के लिया गया था फैसला: हाई कोर्ट

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की बेंच ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि राज्य सरकार ने दूरी घटाने का निर्णय बिना किसी ठोस वैज्ञानिक अध्ययन  के लिया था। कोर्ट ने कहा कि तथाकथित एक्सपर्ट कमेटी की रिपोर्ट में गंभीर खामियां हैं और अन्य राज्यों की नकल करते हुए झारखंड की विशिष्ट भौगोलिक स्थिति को नजरअंदाज किया गया है।

 “पर्यावरण मामलों में ‘Precautionary Principle’ (सावधानी सिद्धांत) सर्वोपरि है। बिना ठोस आधार के सुरक्षा मानकों में ढील नहीं दी जा सकती।” – *झारखंड हाई कोर्ट

1 जून तक देना होगा सर्वे का ब्यौरा

अदालत ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (JSPCB) को सख्त निर्देश दिया है कि वह उन सभी खदानों और क्रशर इकाइयों का सर्वे करे जिन्हें जंगलों के 1 किलोमीटर के दायरे में लाइसेंस दिया गया है। इसकी विस्तृत रिपोर्ट  1 जून 2026  तक अदालत में पेश करनी होगी।

अगली सुनवाई और प्रभाव

इस मामले की अगली सुनवाई  18 जून 2026  को तय की गई है। जानकारों का मानना है कि इस फैसले से उन खनन संचालकों को बड़ा झटका लगा है जो घने जंगलों की सीमा के बिल्कुल करीब काम कर रहे थे। पर्यावरणविदों ने कोर्ट के इस कदम का स्वागत किया है, क्योंकि इससे झारखंड के वन क्षेत्र और वन्यजीवों के आवास को सुरक्षा मिलेगी।

नोट -इस  मामले में अगली सुनवाई के बाद नियमों में और स्पष्टता आने की उम्मीद है।

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