बाबा कार्तिक उरांव की जयंती पर उनके अधूरे कार्यों को पूरा करने का लिया संकल्प

रांची: जनजातीय समाज के उत्थान, शिक्षा और अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष करने वाले बाबा कार्तिक उरांव की जयंती एक नवंबर को बरियातू स्थित आरोग्य भवन के सभागार में धूमधाम से मनाई गई। जनजाति सुरक्षा मंच की ओर से आयोजित कार्यक्रम में उनके चित्र पर दीप प्रज्वलित और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी गई। इस दौरान उनके विचारों और आदर्शों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि पूर्व सांसद एवं पूर्व मंत्री सुदर्शन भगत ने कहा कि जनजाति सुरक्षा मंच पूरे देश में कार्तिक बाबू के अधूरे कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि जनजातीय परंपरा, रीति-रिवाज और संस्कृति छोड़कर अन्य धर्म अपनाने वाले लोगों को अनुसूचित जनजाति आरक्षण का लाभ नहीं मिलने की मांग बाबा कार्तिक उरांव ने भी उठाई थी।

विशिष्ट अतिथि पूर्व राज्यसभा सांसद समीर उरांव ने कार्तिक उरांव के जीवन और योगदान पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कार्तिक उरांव का जन्म 29 अक्टूबर 1924 को गुमला जिले के सिसई प्रखंड स्थित करौंदा लिटाटोली में एक गरीब परिवार में हुआ था। आर्थिक कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने शिक्षा हासिल की और आगे चलकर इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए पटना तथा उच्च शिक्षा के लिए विदेश गए।
समीर उरांव ने कहा कि बाबा कार्तिक उरांव ने आदिवासी समाज को शिक्षित, संगठित और जागरूक करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कांके में बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, धुर्वा में हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन और राजेंद्र मेडिकल कॉलेज जैसी संस्थाओं की स्थापना में उनका योगदान रहा। उन्होंने केंद्रीय सरना स्थल सिरमटोली की जमीन को बचाने, सरहुल शोभायात्रा के माध्यम से आदिवासी समाज को एकजुट करने और अखिल भारतीय आदिवासी विकास परिषद के गठन में भी अहम भूमिका निभाई।
उन्होंने कहा कि कार्तिक उरांव ने आदिवासियों के हक-अधिकार और धर्मांतरण से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाया था। वर्ष 1967-70 के दौरान उन्होंने अनुसूचित जनजाति आरक्षण से संबंधित एक विधेयक प्रस्तुत किया था, जिस पर 348 सांसदों के हस्ताक्षर थे। हालांकि, यह विधेयक पारित नहीं हो सका। उन्होंने कार्तिक उरांव की पुस्तक ‘बीस वर्ष की काली रात’ का भी उल्लेख किया और कहा कि इसमें आदिवासी समाज के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को उठाया गया है।

कार्यक्रम को रांची की महापौर रोशनी खलखो और केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जनजाति सुरक्षा मंच के क्षेत्रीय संयोजक संदीप उरांव ने की, जबकि संचालन मंच के संयोजक सुनील उरांव ने किया। धन्यवाद ज्ञापन मीडिया प्रभारी सोमा उरांव ने किया।
इस अवसर पर गुरुचरण मुंडा, विश्वकर्मा पहान, हिंदुवा उरांव, बालेश्वर पहान, चारवा खलखो, नामित हेमराम, वार्ड पार्षद नकुल तिर्की, प्रदीप लकड़ा, सुजाता मुंडा, सुषमा कुमारी, दीनबंधु सिंह, जादो उरांव सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता और समाज के अगुवा उपस्थित थे।

रामरेखा धाम कार्तिक मेले का टेंडर रद्द करने की मांग, आंदोलन की चेतावनी
निर्मल सिंह गुमला: सिमडेगा के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल श्री रामरेखा धाम में कार्तिक पूर्णिमा मेले के आयोजन को लेकर निकाले गए टेंडर…

सरदार पटेल की जयंती पर सिमडेगा भाजपा की बैठक में ओबीसी मोर्चा पर चर्चा, प्रेस विज्ञप्ति से लौह पुरुष का जिक्र गायब
सिमडेगा: लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर जहां देशभर में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया गया और भाजपा की केंद्र सरकार…

















