High Court

झारखण्ड हाईकोर्ट में पलामू में जारी अवैध खनन ( illegal mining )के खिलाफ जनहित याचिका दायर 50 से अधिक क्रशर वनक्षेत्र के

Ranchi : झारखण्ड हाईकोर्ट में पलामू में जारी अवैध खनन ( illegal mining)के खिलाफ जनहित याचिका दायर की गयी है. इसमें जिला के कई इलाके में हो रहे अवैध पत्थर के उत्खनन पर रोक लगाने की मांग की गयी है. याचिकाकर्ता रत्नेश गुप्ता की तरफ से अधिवक्ता राजीव कुमार ने ये PIL दायर की है .हाई कोर्ट में दायर इस जनहित याचिका में याचिकर्ता ने 100  से अधिक अवैध क्रशर की सूची उपलब्ध कराते हुए इन्हें तत्काल बंद कराने की मांग की है.

इसके साथ ही अवैध क्रशर के संचालकों की संपत्ति की जाँच ED  और INCOMTAX  टैक्स से कराने की भी मांग की है .याचिका कर्ता ने माननीय न्यायालय को यह बताया है कि अधिकतर क्रशर पूरी तरह से अवैध हैं और स्थानीय जिला प्रशासन,जिला खनन पदाधिकारी तथा रेंजर की मिली- भगत से अवैध क्रशर का संचालन होता है.

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जिन क्रशर संचालको के पास माइनिंग लाइसेंस है वे सिर्फ दिखावे के लिए कागज पर हैं , जमीन पर वे खनन नियमों की धज्जिया उड़ाते हुए यह क्रशर मालिक दिखेंगे .इनके क्रशर के स्टॉक तथा बिक्री पंजी आदि का कभी निरीक्षण नहीं होता है .खनन पदाधिकारी और जिला प्रशासन इस बात पर भी ध्यान नहीं देते कि क्रशर में उपयोग होने वाला पत्थर वन क्षेत्र से आ रहा है .

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छतरपुर के चेराई रोड में,तेलाडी रोड,मुरुमदाग और पिपरा प्रखंड रोड में 50 से अधिक क्रशर वनक्षेत्र के पत्थर पर निर्भर हैं . याचिकाकर्ता ने प्रतिदिन करोड़ों रुपये की राजस्व हानि होने का उल्लेख अपने याचिका में किया है.याचिकाकर्ता ने उपलब्ध कराये कागजात में इस बात का उल्लेख किया है कि धूल ,प्रदूषण और ब्लास्टिंग से कई गांवों के लोग सांस लेने की तकलीफ और कैंसर जैसी बीमारियों से जूझ रहे हैं .इसकी जानकारी जिला प्रशासन और जन प्रतिनिधियों को भी है साथ ही विधानसभा कमेटी का भी उल्लेख इस जनहित याचिका में है, जिन्होंने यह माना था कि अधिकतर क्रशर अवैध हैं जो स्कूल के किनारे , नेशनल हाईवे तथा जंगल में संचालित हो रहे हैं . याचिकाकर्ता ने अवैध क्रशर संचालकों के नामों का उल्लेख भी इस जनहित याचिका में की है .साथ ही 150 क्रशरों की सूची इस याचिका में माननीय न्यालय को उपलब्ध कराई है .

 

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