धनबाद : बाघमारा में अवैध कोयला खनन के दौरान चाल धंसी, दो महिलाओं की मौत; कई लोगों के दबे होने की आशंका
गोविंद /धनबाद
धनबाद। बाघमारा प्रखंड के रामकनाली ओपी क्षेत्र स्थित कुम्हारपट्टी रोड पर रविवार सुबह अवैध कोयला खनन के दौरान अचानक चाल धंसने से बड़ा हादसा हो गया। मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटनास्थल से निकाली गई दो गंभीर रूप से घायल महिलाओं की अस्पताल ले जाने के दौरान मौत हो गई। स्थानीय लोगों की मदद से राहत-बचाव का काम जारी है। मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
बंद खदान में चल रहा था कोयला उत्खनन
स्थानीय लोगों के अनुसार, कुम्हारपट्टी रोड के आसपास लंबे समय से बंद खदानों और भूमिगत हिस्सों में अवैध तरीके से कोयला निकाले जाने का आरोप लगता रहा है। रविवार सुबह भी कुछ लोग कथित तौर पर कोयला निकालने के लिए खनन क्षेत्र में गए थे। इसी दौरान अचानक ऊपर की चाल भरभराकर गिर गई और लोग मलबे में फंस गए।
ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार अवैध उत्खनन के कारण जमीन के भीतर की संरचना कमजोर हो गई है। उनका कहना है कि क्षेत्र में पहले भी जमीन धंसने और खतरनाक स्थिति के संकेत मिलते रहे हैं, बावजूद इसके अवैध खनन पर प्रभावी रोक नहीं लग सकी।
हालांकि, हादसे के कारणों और मलबे में फंसे लोगों की वास्तविक संख्या की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।

मौत के बाद भी सामने आया अवैध खनन का कड़वा सच
धनबाद के कोयला क्षेत्रों में बंद या परित्यक्त खदानों से अवैध तरीके से कोयला निकालने का मामला नया नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि आर्थिक मजबूरी में स्थानीय लोग जोखिम उठाकर इन खदानों में प्रवेश करते हैं। आरोप है कि अवैध खनन का संचालन करने वाले लोग मजदूरों को मामूली रकम देकर जान जोखिम में डालने के लिए मजबूर करते हैं।
हादसा होने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि खदान अवैध रूप से संचालित हो रही थी, तो वहां लोगों की आवाजाही और कोयला उत्खनन लंबे समय तक कैसे चलता रहा?

नेताओं के विरोध के बावजूद नहीं थम रहा अवैध उत्खनन
धनबाद के कोयला क्षेत्रों में अवैध उत्खनन के खिलाफ हाल के दिनों में राजनीतिक स्तर पर भी आवाज उठती रही है। सांसद ढुल्लू महतो समेत झरिया, निरसा और बाघमारा क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने अवैध खनन और कथित कोयला माफिया के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो ने भी इस घटना के संदर्भ में अवैध खनन को जमीन कमजोर होने की वजह बताते हुए प्रशासन और बीसीसीएल की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले की जांच की मांग की है।

CISF की कार्रवाई के बावजूद सवाल बरकरार
अवैध कोयला खनन और कोयला चोरी पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) की ओर से भी अभियान चलाया गया है। ‘जीरो कोल लिकेज प्लान’ के तहत झारखंड और पश्चिम बंगाल में बड़ी संख्या में छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान अवैध कोयला खनन के कई स्थानों को चिन्हित कर सील करने तथा बड़ी मात्रा में अवैध कोयला जब्त करने की बात सामने आई थी।
इसके बावजूद धनबाद-बोकारो और आसपास के कोयला क्षेत्रों में अवैध खनन के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। साइकिल, बाइक और छोटे वाहनों के जरिए कोयले की ढुलाई की शिकायतें भी स्थानीय स्तर पर उठती रही हैं।

लगातार भू-धंसाव से बढ़ी चिंता
धनबाद कोयलांचल में अवैध खनन के साथ-साथ भू-धंसाव की घटनाएं भी गंभीर चिंता का विषय बनी हुई हैं। पिछले कुछ महीनों में अलग-अलग कोयला क्षेत्रों से जमीन धंसने की कई घटनाएं सामने आई हैं।
सिजुआ क्षेत्र में 8 सितंबर को भू-धंसाव की घटना में एक 10 वर्षीय बच्चे की मौत और कई लोगों के घायल होने की सूचना सामने आई थी। घटना के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन और बीसीसीएल के खिलाफ प्रदर्शन किया था। उस समय भी अवैध खनन को जमीन कमजोर होने की संभावित वजह बताया गया था।
प्रधानमंत्री के सलाहकार के दौरे के बाद भी हादसा
प्रधानमंत्री के सलाहकार तरुण कपूर ने 31 अगस्त और 1 सितंबर को धनबाद कोयलाफील्ड का दौरा कर कोयला क्षेत्र से जुड़े विभिन्न मुद्दों की समीक्षा की थी। इसके बावजूद कुछ ही दिनों के भीतर बाघमारा में कथित अवैध खनन के दौरान चाल धंसने की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था और अवैध उत्खनन पर नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि बंद और असुरक्षित खदानों में लोगों की पहुंच कैसे बनी हुई है और हादसे के बाद जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
फिलहाल स्थानीय स्तर पर राहत-बचाव जारी है। प्रशासन की ओर से मलबे में फंसे लोगों की संख्या, मृतकों की पहचान और हादसे के वास्तविक कारणों की आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।


















