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ED:-पूजा सिंघल का डिस्चार्ज आवेदन खारिज, कोर्ट बोला- पर्याप्त सबूत हैं, 5 को होगा आरोप गठित

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प्रेरणा चौरसिया

Drishti  Now  Ranchi

ईडी की विशेष अदालत ने निलंबित आईएएस और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपी पूर्व राज्य खनन सचिव पूजा सिंघल की आरोपमुक्ति की अर्जी खारिज कर दी है। पूजा सिंघल ने अदालत से उनके खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप को छोड़ने के लिए कहा क्योंकि ईडी उनके खिलाफ कोई निर्णायक सबूत इकट्ठा करने में असमर्थ थी। अगली तारीख को अब विशेष अदालत पूजा सिंघल के खिलाफ आरोप तय करेगी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद ईडी के लिए विशेष न्यायाधीश पीके शर्मा की अदालत ने आरोपी पूजा सिंघल की आरोपमुक्ति अर्जी पर 25 मार्च को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।

सोमवार को उन्होंने उक्त डिस्चार्ज आवेदन के संबंध में अपना फैसला सुनाया। कोर्ट के मुताबिक, आरोपी पूजा सिंघल के खिलाफ आरोप दर्ज करने के लिए पर्याप्त प्रत्यक्ष और दस्तावेजी सबूत हैं। इसके अतिरिक्त, यह आदेश दिया गया कि मामले में शामिल सभी संदिग्ध 5 अप्रैल को अदालत में आरोप-निर्धारण मुद्दे पर सुनवाई में भाग लेने के लिए उपस्थित हों। पूजा सिंघल वर्तमान में अपनी बेटी की देखभाल के लिए अस्थायी जमानत पर बाहर हैं। सुमन कुमार और इंजीनियर शशि प्रकाश दोनों को हिरासत में लिया गया है।

कोर्ट ने कहा- डीसी रहते पूजा ने अपने खाते में बड़ी रकम जमा की

कोर्ट के आदेश के मुताबिक आरोपी पूजा सिंघल 16 फरवरी 2009 से 19 जुलाई 2010 तक खूंटी के उपायुक्त के पद पर कार्यरत थी. उसके पास प्रमुख अधिकारी के रूप में अपनी क्षमता में विकास योजनाओं के लिए आवंटित धन को स्वीकृत करने की शक्ति थी। राम विनोद प्रसाद सिन्हा उस समय खूंटी जिला परिषद एवं विशेष शाखा द्वारा कनिष्ठ अभियंता के पद पर कार्यरत थे। जिसने अनुसंधान के दौरान ईडी अधिकारी को गवाही दी है कि स्वीकृत राशि का 5% मनरेगा योजना के तहत विकास परियोजनाओं के लिए पूर्ण किए गए कार्य के बदले डीसी कार्यालय, कार्यकारी अभियंता और सहायक अभियंता को चला गया।

अदालत ने कहा कि पूजा के तबादले के बाद, खूंटी के नए डीसी ने पिछले जेई राम विनोद प्रसाद सिन्हा के प्रशासन के दौरान हुई किसी भी अनियमितता को देखने के लिए एक जांच दल का गठन किया। जांच के नतीजे बताते हैं कि विकास परियोजनाओं पर कम काम हुआ। लेकिन सरकारी कोष में से 18 करोड़ से अधिक अनाधिकृत रूप से निकाल लिए गए। आरोपी पूजा के बैंक खातों में बड़ी रकम जमा करा दी गई है।

एमडीएम के 101 करोड़ रु. घोटाले के आरोपी संजय तिवारी ने किया सरेंडर

ईडी के दबाव के बाद मिड डे मिल की 101 करोड़ की राशि का घोटाला करने से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले के आरोपी भानु कंस्ट्रक्शन के संचालक संजय कुमार तिवारी ने सोमवार की सुबह 8.25 बजे ईडी के स्पेशल जज दिनेश राय की कोर्ट में सरेंडर कर दिया। उसे न्यायिक हिरासत में लेकर होटवार भेज दिया गया है। उसकी अगली पेशी पांच अप्रैल को होगी। आरोपी संजय को सुप्रीम कोर्ट से मिली सशर्त अंतरिम जमानत की अवधि 25 मार्च को खत्म हो गयी थी। लेकिन, उसने कोर्ट में सरेंडर न कर फर्जी कोविड-19 रिपोर्ट जमाकर कोर्ट को गुमराह किया था। ईडी ने उसकी फर्जीवाड़े को पकड़ा। इसके बाद वह फरार हो गया। ईडी ने शनिवार को उसके खिलाफ कोर्ट से गिरफ्तारी वारंट लिया और गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी भी की। लेकिन हाथ नहीं लगा।

फरार होने के बाद बदली अपनी वेशभूषा

आरोपी संजय तिवारी ने फरार होने के बाद अपनी वेशभूषा में बदलाव किया। उसने लंबे बालों को छोटा किया। दाढ़ी भी मुड़वा दी। हुलिया बदलने के कारण वह पहचान में नहीं आ रहा था। सोमवार को जब उसने मास्क लगाकर कोर्ट के सामने सरेंडर किया, तो विशेष न्यायाधीश दिनेश राय ने उसका मास्क हटवाया। जज को भी उसे पहचाने में दिक्कत आई। इसके पहले वह जब भी कोर्ट में आया, लंबे बाल और दाढ़ी में था।

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई 17 को

आरोपी संजय की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई की तारीख 17 अप्रैल निर्धारित की गई है। आरोपी की ओर से 18 अप्रैल 22 को जमानत अर्जी दाखिल की गई थी। उसे अंतरिम जमानत 30 जनवरी को मिली। जिसका उसने उल्लंघन किया है।

 

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