ईंधन संकट: पीएम मोदी दिखे सिर्फ दो गाड़ियों के काफिले में ,अब झारखंड राज्यपाल ने भी बढ़ाया हाथ
देश के PM की सुरक्षा SPG के हांथो में होती है ।आम तौर पर देखा जाता है की सुरक्षा की दृष्टि से उनके काफिले में 14 से 15 गाड़ियां होती है । लेकिन ईंधन संकट के बीच मोदी बुधवार को सिर्फ दो गाड़ियों के काफिले में नजर आए
Desk : दुनिया इस वक्त एक बड़े ऊर्जा संकट (Energy Crisis) के मुहाने पर खड़ी है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़े युद्ध ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने काफिले को घटाकर मात्र दो गाड़ियों तक सीमित करने का निर्णय केवल ‘सादगी’ नहीं, बल्कि देश को आने वाले कठिन समय के लिए तैयार करने का एक बड़ा कूटनीतिक संदेश है।
ईंधन संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद से एक बड़ी पहल की है । आज बुधवार को प्रधानमंत्री सिर्फ दो गाड़ियों के काफिले में नजर आए । पहली कर में सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी थे जबकि दूसरी कार में एसपीजी और प्रोटोकॉल के अधिकारी थे । इससे पहले के वीडियो में जब प्रधानमंत्री केबिनेट की बैठक में पहुँचे थे तो उनके काफिले में चार गाड़ियां थी।
स्ट्रेट ऑफ हारमुज (Strait of Hormuz) बंद: क्यों खड़ा हुआ संकट?
वैश्विक ईंधन आपूर्ति का लगभग 20% से 30% हिस्सा ‘स्ट्रेट ऑफ हारमुज’ से होकर गुजरता है। ईरान और इजरायल-अमेरिका संघर्ष के कारण इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर आवाजाही ठप है।
पीएम मोदी का ‘मास्टर स्ट्रोक’: खुद से की शुरुआत
प्रधानमंत्री ने पीएम ने देश से वर्क-फ्रॉम-होम, सार्वजनिक परिवहन के उपयोग और अनावश्यक विदेश यात्राओं को टालने का भी आह्वान किया है। लेकिन उन्होंने शुरुआत खुद कर दी और अपने काफिले में गाड़ियों की कटौती कर दी।
झारखंड राज्यपाल की सराहनीय पहल
पीएम मोदी के इसी आह्वान का असर अब राज्य स्तर पर दिखने लगा है। झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने लोक भवन’ से बड़ा निर्णय लेते हुए अपने कारकेड में गाड़ियों की संख्या घटाकर मात्र 4 कर दी है।
राज्यपाल ने लिखा “माननीय प्रधानमंत्री श्री @narendramodi जी के आह्वान पर ईंधन संरक्षण एवं संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग के उद्देश्य से लोक भवन, झारखण्ड में मेरे द्वारा कारकेड में वाहनों की संख्या घटाकर मात्र 4 गाड़ियाँ रखने का निर्णय लिया गया है।
देश के लिए क्यों जरूरी है यह बचत?
1. विदेशी मुद्रा की बचत: ईंधन कम खर्च होगा तो तेल आयात पर खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा बचेगी।
2. महंगाई पर नियंत्रण: ईंधन की खपत कम होने से बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन बनाने में मदद मिलेगी।
3. पर्यावरण संरक्षण: यह कदम न केवल संकट से निपटने के लिए है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभकारी है।
प्रधानमंत्री और राज्यपाल के इन फैसलों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब दुनिया युद्ध और संकट से जूझ रही है, तब भारत ‘आत्मनिर्भरता’ और ‘बचत’ के रास्ते पर चलकर अपनी अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने की कोशिश कर रहा है।


















