बड़ा तालाब से 36 एकड़ जमीन गायब मामले में रांची नगर निगम ने शुरू की ड्रोन मैपिंग, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब होगी तेज
बड़ा तालाब से 36 एकड़ जमीन गायब मामले में रांची नगर निगम ने शुरू की ड्रोन मैपिंग, अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई अब होगी तेज
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!रांची, 27 दिसंबर : रांची की पहचान कहे जाने वाले बड़ा तालाब (स्वामी विवेकानंद सरोवर या रांची झील) के अस्तित्व पर मंडरा रहा संकट अब खुलकर सामने आ गया है। दस्तावेजों के अनुसार तालाब और उसके आसपास की कुल जमीन 53 एकड़ है, लेकिन वर्तमान में जल क्षेत्र केवल 17 एकड़ बचा है। शेष 36 एकड़ जमीन पर लंबे समय से अतिक्रमण हो गया है, जिसमें अवैध भवन, दुकानें और अन्य निर्माण शामिल हैं।झारखंड हाईकोर्ट के सख्त निर्देश पर रांची नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू कर दिया है। कोर्ट ने राज्य के सभी जलस्रोतों से अतिक्रमण हटाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के आदेश दिए हैं।
इसी क्रम में बड़ा तालाब क्षेत्र की विस्तृत नाप-जोख और ड्रोन मैपिंग शुरू की गई है, ताकि अतिक्रमण की सटीक पहचान हो सके।
आज ड्रोन मैपिंग और निरीक्षण में नगर निगम के प्रशासक सुशांत गौरव और अपर प्रशासक की टीम मौके पर पहुंची। इस दौरान अंचल अधिकारी भी मौजूद है । टीम ने तालाब के आसपास के निर्माणों के कागजात मंगवाए हैं। अवैध पाए जाने पर नोटिस जारी कर मुकदमा और बुलडोजर कार्रवाई की जाएगी।नगर निगम ने दो अलग-अलग जांच टीमों का गठन किया है, जो जल्द रिपोर्ट सौंपेंगी। साथ ही, आसपास की दुकानों और भवनों से ट्रेड लाइसेंस, होल्डिंग टैक्स और भवन प्लान की जांच की जा रही है।
जाहिर है ब्रिटिश काल में 1842 में खोदा गया यह तालाब रांची का प्रमुख पर्यटन स्थल है। अतिक्रमण के कारण इसका जल क्षेत्र सिकुड़ता जा रहा था, जिससे शहर में जल संकट और पर्यावरणीय असंतुलन का खतरा बढ़ गया है। कोर्ट के दखल से अब उम्मीद जगी है कि बड़ा तालाब को उसकी मूल स्थिति में बहाल किया जा सकेगा।

















