कभी 53 एकड़ वाला रांची का बड़ा तालाब सिकुड़कर 17 एकड़ हो गया, 36 एकड़ जमीन गायब! ड्रोन मैपिंग में हुआ खुलासा
कभी 53 एकड़ वाला रांची का बड़ा तालाब सिकुड़कर 17 एकड़ हो गया, 36 एकड़ जमीन गायब! ड्रोन मैपिंग में हुआ खुलास
रांची, 23 दिसंबर : झारखंड की राजधानी रांची का ऐतिहासिक बड़ा तालाब (स्वामी विवेकानंद सरोवर) अब अपनी मूल आकृति खो चुका है। नगर निगम द्वारा की गई ड्रोन मैपिंग और भूमि मापी से चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि तालाब की कुल 53 एकड़ जमीन में से 36 एकड़ जमीन अतिक्रमण के कारण गायब हो गई है। अब तालाब का जल क्षेत्र महज 17 एकड़ तक सिमट गया है।
झारखंड हाईकोर्ट के सख्त निर्देश के बाद रांची नगर निगम ने शहर के सभी जलाशयों से अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शुरू की है। इसी क्रम में सोमवार को अपर प्रशासक संजय कुमार के नेतृत्व में बड़ी टीम ने बड़ा तालाब का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान फीते से जमीन की मापी की गई और ड्रोन सर्वे के जरिए एरियल मैपिंग कराई गई।
क्या सामने आया?
नगर निगम के पुराने रिकॉर्ड के अनुसार बड़ा तालाब कभी 53 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ था।
ड्रोन मैपिंग और मापी से पता चला कि वर्तमान में तालाब का जल क्षेत्र केवल 17 एकड़ बचा है।
करीब 36 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण होने की पुष्टि हुई है।
तालाब के चारों ओर पक्की सड़कें बनने के बाद कई आवासीय मकान, व्यावसायिक दुकानें, भवन और अन्य निर्माण अवैध रूप से खड़े हो गए।
अपर प्रशासक ने दिए सख्त निर्देश
अपर प्रशासक संजय कुमार ने इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए। उन्होंने कहा कि अंचल अधिकारी (सीओ) को दो दिनों के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। साथ ही निर्देश दिए कि अंचल टीम के साथ मिलकर तालाब के पूरे 53 एकड़ क्षेत्र की वैज्ञानिक और विधिवत मापी कराई जाए।निरीक्षण के दौरान टीम ने स्थानीय लोगों से बातचीत की और अवैध निर्माणों की पहचान की।
अपर प्रशासक ने नगर निगम की टीम को युद्धस्तर पर जांच करने और अतिक्रमण मुक्त अभियान चलाने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि भवनों, दुकानों और प्रतिष्ठानों के होल्डिंग टैक्स, ट्रेड लाइसेंस और भवन नक्शों की भी जांच की जाए।
अतिक्रमण हटाने से क्या प्रभाव?
यदि नगर निगम सख्ती से कार्रवाई करता है, तो बड़ा तालाब के आसपास बने कई पक्के मकान, दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान ध्वस्त हो सकते हैं। स्थानीय लोग पहले ही इसकी आशंका जता चुके हैं।
ऐतिहासिक महत्व
बड़ा तालाब करीब 180 साल पुराना है। इसे 1845 में कुंवर श्रीनाथ ने खुदवाया था। इसकी एक तरफ कंक्रीट घाट भी बनवाया गया। रांची नगर निगम इसका मालिक है। यह तालाब शहर की जल संरक्षण और पर्यावरण व्यवस्था का अहम हिस्सा रहा है, लेकिन पिछले कुछ दशकों में लापरवाही के कारण इसका क्षेत्रफल लगातार घटता गया।
आज भी जांच , नापी जारी
नगर निगम ने स्पेशल जांच टीम गठित की है, जो 22 दिसंबर से काम शुरू कर चुकी है। ड्रोन मैपिंग के आधार पर अतिक्रमण की पूरी सूची तैयार की जा रही है। जल्द ही अवैध निर्माणों पर नोटिस जारी किए जाएंगे और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

















