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इंडिया ब्लॉक का मेगा मार्च: राहुल गांधी के नेतृत्व में सांसद आज दिल्ली में करेंगे ‘वोट चोरी’ के खिलाफ प्रदर्शन

नई दिल्ली : इंडिया गठबंधन (INDIA Bloc) के सांसद, कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की अगुआई में आज संसद भवन से चुनाव आयोग के दफ्तर तक पैदल मार्च करेंगे। यह मार्च बिहार में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) और 2024 के लोकसभा चुनावों में कथित ‘वोट चोरी’ के खिलाफ विरोध जताने के लिए आयोजित किया जा रहा है। मार्च सुबह 11:30 बजे संसद भवन से शुरू होगा और लगभग एक किलोमीटर की दूरी तय कर चुनाव आयोग मुख्यालय तक पहुंचेगा।

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इंडिया गठबंधन का आरोप है कि बिहार में चल रहा SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची में अनियमितताएं, विशेष रूप से कथित तौर पर फर्जी वोटरों के जरिए, लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर कर रही हैं। राहुल गांधी ने हाल ही में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि कर्नाटक के महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में एक लाख से अधिक फर्जी वोटरों के नाम मतदाता सूची में शामिल किए गए, जिसके कारण कांग्रेस को यह सीट गंवानी पड़ी। उन्होंने इसे “वोट चोरी” और “लोकतंत्र पर परमाणु बम” करार दिया।

कांग्रेस ने रविवार को ‘वोट चोरी’ के खिलाफ एक ऑनलाइन अभियान शुरू किया, जिसमें लोगों से वेब पोर्टल votechori.in/ecdemand पर रजिस्टर करने या 9650003420 पर मिस्ड कॉल देने की अपील की गई। राहुल गांधी ने X पर पोस्ट कर कहा, “वोट चोरी ‘एक व्यक्ति, एक वोट’ के मूल सिद्धांत पर हमला है। स्वच्छ मतदाता सूची निष्पक्ष चुनावों के लिए अनिवार्य है। हमारी मांग साफ है चुनाव आयोग पारदर्शी हो और डिजिटल मतदाता सूची जारी करे ताकि लोग और पार्टियां इसकी जांच कर सकें।”

राहुल गांधी ने कर्नाटक के बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र में एक 70 वर्षीय महिला, शकुन रानी, के दो बार वोट डालने का आरोप लगाया था। हालांकि, कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि शकुन रानी ने केवल एक बार वोट दिया। CEO ने राहुल गांधी से उनके दावों के समर्थन में दस्तावेज जमा करने को कहा है, क्योंकि उनके द्वारा पेश किया गया टिक-मार्क वाला दस्तावेज मतदान अधिकारी द्वारा जारी नहीं किया गया था।

चुनाव आयोग ने SIR को एक नियमित प्रक्रिया बताया है और कहा कि बिहार में 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 99% को इस प्रक्रिया में शामिल किया गया है। आयोग के अनुसार, 21.6 लाख मतदाता मृतक हैं, 31.5 लाख स्थायी रूप से पलायन कर चुके हैं, सात लाख का नाम कई जगहों पर दर्ज है, और एक लाख मतदाता अप्राप्य हैं। हालांकि, विपक्ष का कहना है कि यह प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इससे कई वंचित समूहों, खासकर दिहाड़ी मजदूरों और प्रवासी श्रमिकों, का मताधिकार छिन सकता है।

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