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जमशेदपुर : उगाही में भिड़े दो पुलिसकर्मी , सोशल मीडिया में मामला सुर्खियों में

जमशेदपुर के मानगो में एक स्कूटी सवार का आधे घंटे में दो बार चालान कट गया और इस दौरान उसकी परीक्षा भी छूट गयी । युवक का नाम शाहिद  है । शाहिद अपनी परीक्षा के लिए जा रहा था। जानकारी के अनुसार, सुबह के समय मानगो चौक पर ट्रैफिक पुलिस ने उसकी स्कूटी को रोका और नियमों के उल्लंघन का हवाला देते हुए पहला चालान काटा। यह चालान  एक हजार रुपये का था। 
हालांकि, इसके आधे घंटे के भीतर उसी स्कूटी का दूसरा चालान काटा गया। इस बार यह पच्चीस हजार का था। दूसरा चालान काटने का कारण बताया गया कि वाहन को नाबालिग चला रहा था। शाहिद ने दावा किया कि वह नाबालिग नहीं है और उसका लाइसेंस भी वैध है, लेकिन ट्रैफिक पुलिस ने उसकी एक बात नहीं सुनी। इस बीच, उसकी परीक्षा का समय नजदीक आता जा रहा था।
इसी दौरान स्थिति तब और उलझ गई जब ट्रैफिक थानेदार और एएसआई अनिरुद्ध प्रसाद के बीच इस चालान को लेकर बहस शुरू हो गई। 
एएसआई का कहना था कि दूसरा चालान गलत काटा गया और यह उगाही का मामला हो सकता है। वहीं, थानेदार ने अपने फैसले का बचाव किया और कहा कि नियमों का सख्ती से पालन करना उनकी जिम्मेदारी है। यह बहस जल्द ही गरमागरम तकरार में बदल गई, और मानगो ट्रैफिक पोस्ट पर जोरदार हंगामा शुरू हो गया। वहाँ मौजूद लोगों ने बताया कि दोनों अधिकारियों के बीच चीखने-चिल्लाने तक की नौबत आ गई, जिससे आसपास भीड़ जमा हो गई।
इस हंगामे का सबसे दुखद परिणाम शाहिद के लिए हुआ। वह अपनी परीक्षा के लिए समय पर नहीं पहुँच सका और उसकी परीक्षा छूट गई। 
घटना का स्थान और समय
यह घटना जमशेदपुर के मानगो इलाके में, खास तौर पर मानगो चौक के पास ट्रैफिक पोस्ट पर हुई। 
स्कूटी सवार और पहला चालान
स्कूटी सवार शाहिद, जो  परीक्षा के लिए जा रहा था, उसकी स्कूटी को ट्रैफिक पुलिस ने रोका और पहला चालान काटा। यह चालान  एक हजार का था। 
दूसरा चालान और विवाद की शुरुआत
आधे घंटे के भीतर, उसी मानगो चौक क्षेत्र में, 
शाहिद की स्कूटी को दोबारा रोका गया। इस बार चालान 25  हजार का काटा गया, और कारण बताया गया कि वाहन को नाबालिग चला रहा था।
थानेदार और ASI का टकराव
मामला तब और गंभीर हो गया जब ट्रैफिक थानेदार और एएसआई अनिरुद्ध प्रसाद के बीच बहस छिड़ गई। एएसआई का तर्क था कि दूसरा चालान गलत था और यह पुलिस की छवि को खराब कर सकता है। उसने इसे उगाही का संदेह जताया, क्योंकि शाहिद के नाबालिग होने का कोई ठोस सबूत नहीं था। दूसरी ओर, ट्रैफिक थानेदार ने अपने फैसले को सही ठहराया और कहा कि नियमों का पालन कराना उनका कर्तव्य है।
यह बहस जल्द ही गरमागरम हो गई। दोनों अधिकारियों ने एक-दूसरे पर चिल्लाना शुरू कर दिया। कुछ 
शाहिद की परीक्षा छूटना
इस पूरे हंगामे का सबसे बड़ा नुकसान शाहिद को हुआ। वह अपनी परीक्षा के लिए जा रहा था,  चालान और उसके बाद हुए विवाद में उसका करीब आधा घंटा  बर्बाद हो गया। जब तक मामला शांत हुआ, तब तक बहुत देर हो चुकी थी और वह परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुँच सका।
सोशल मीडिया पर वायरल
घटना की खबर स्थानीय स्तर पर तेजी से फैली और सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई। लोग इसे पुलिस सिस्टम में जवाबदेही की कमी का उदाहरण मान रहे हैं।
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