पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मसूद अजहर का ऑडियो संदेश सोशल मीडिया पर वायरल

पाकिस्तान स्थित जैश-ए-मोहम्मद का प्रमुख मसूद अजहर का ऑडियो संदेश सोशल मीडिया पर वायरल

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प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) के संस्थापक और प्रमुख मौलाना मसूद अजहर का एक कथित ऑडियो संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस ऑडियो में अजहर दावा कर रहे हैं कि उनके संगठन के पास हजारों आत्मघाती (फिदायीन) हमलावर तैयार हैं, जो किसी भी समय हमले के लिए पूरी तरह तत्पर हैं। हालांकि ऑडियो की प्रामाणिकता की अभी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

ऑडियो में मसूद अजहर को यह कहते सुना जा सकता है कि उनके फिदायीन हमलावर “एक नहीं, दो नहीं, सौ नहीं, हजार भी नहीं” हैं, और यदि वे संगठन में मौजूद आतंकियों की वास्तविक संख्या सार्वजनिक कर दें तो “दुनिया भर के मीडिया में हलचल मच जाएगी”। उन्होंने जोर देकर कहा कि ये आतंकी किसी सांसारिक सुविधा, धन, वाहन या विदेशी वीजा की मांग नहीं करते, बल्कि केवल “शहादत” (मार्टर्डम) की तलब रखते हैं। अजहर ने यह भी जिक्र किया कि उनके कैडर रात के तीन बजे उठकर सिर्फ अल्लाह से शहादत मांगते हैं।

यह ऑडियो ऐसे समय में सामने आया है जब पिछले साल मई में भारत द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर।के तहत जैश-ए-मोहम्मद के कई ठिकानों पर सटीक हमले किए गए थे। इन हमलों में संगठन का मुख्यालय बहावलपुर भी निशाना बना था, जहां मसूद अजहर के कई करीबी रिश्तेदार और शीर्ष कमांडर मारे गए थे। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह ऑडियो संगठन के घटते मनोबल को बढ़ाने और प्रोपेगैंडा फैलाने की कोशिश है, न कि कोई वास्तविक ऑपरेशनल खतरा।

सुरक्षा एजेंसियां इस ऑडियो की प्रामाणिकता की जांच कर रही हैं, जबकि इसे प्रो-आईएसआई अकाउंट्स द्वारा शेयर किया गया बताया जा रहा है। साथ ही, लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी चीफ सैफुल्लाह कसूरी का एक वीडियो भी वायरल हुआ है, जिसमें पाकिस्तानी सेना से जुड़े दावे किए गए हैं। दोनों संदेशों को समन्वित प्रोपेगैंडा प्रयास माना जा रहा है।

मसूद अजहर, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा वैश्विक आतंकवादी घोषित हैं, 2019 से सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आया हैं। वह पुलवामा (2019), पठानकोट (2016) और संसद हमले (2001) जैसे कई बड़े हमलों के मास्टरमाइंड माने जाता हैं।

भारतीय सुरक्षा बल इस तरह के खतरों के प्रति सतर्क हैं और सीमा पर निगरानी बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञ इसे “बौखलाहट भरी गीदड़भभकी” करार दे रहे हैं, जो ऑपरेशन सिंदूर के बाद जैश की कमजोर स्थिति को दर्शाता है।

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