Jharkhand Tribal Delimitation

झारखंड परिसीमन विवाद: आदिवासी संगठनों की मांग, 1971 की जनगणना को ही बनाया जाए आधार

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Jharkhand Tribal Delimitation

रांची: झारखंड में लोकसभा और विधानसभा परिसीमन की चर्चा के बीच आदिवासी समुदाय की चिंताएं बढ़ती जा रही हैं। राज्य के प्रमुख संगठन ‘झारखंड एवं राजी पाहड़ा सरना प्रार्थना सभा’ ने आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आगामी परिसीमन प्रक्रिया पर अपनी कड़ी आपत्ति और सुझाव दर्ज कराए हैं।

परिसीमन का आधार 1971 की जनगणना हो

संगठन के नेताओं ने स्पष्ट रूप से मांग की है कि राज्य में परिसीमन की प्रक्रिया वर्ष 1971 की जनगणना के आधार पर ही की जानी चाहिए। उनका तर्क है कि वर्तमान में जनसंख्या के बदलते आंकड़ों के आधार पर परिसीमन करने से आदिवासी बहुल क्षेत्रों का स्वरूप बदल सकता है, जिससे समुदाय का राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रभावित होगा।

क्यों आशंकित हैं आदिवासी संगठन?

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान वक्ताओं ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:

राजनीतिक प्रतिनिधित्व: संगठन का मानना है कि यदि नए आंकड़ों के आधार पर परिसीमन होता है, तो आदिवासी आरक्षित सीटों की संख्या और उनका भौगोलिक दायरा प्रभावित हो सकता है।
आरक्षण का अनुपात: नेताओं ने कहा कि 1971 की जनगणना के आधार पर तय किया गया अनुपात ही आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सबसे उपयुक्त है।

समुदाय पर प्रभाव: परिसीमन के स्वरूप में किसी भी प्रकार का बदलाव आदिवासी बहुल क्षेत्रों में उनकी संख्या और राजनीतिक प्रभाव को कम कर सकता है, जो समुदाय के लिए चिंता का विषय है।

संगठन ने सरकार और संबंधित अधिकारियों से अपील की है कि वे परिसीमन की प्रक्रिया में आदिवासी समुदायों की भावनाओं और उनके संवैधानिक अधिकारों का विशेष ध्यान रखें। नेताओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी ऐसे निर्णय को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो आदिवासियों के राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों को कमजोर करता हो।

 

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