JPSC प्रिलिम्स विवाद पहुंचा सुप्रीम कोर्ट, 19 अप्रैल को हुई परीक्षा रद्द कर नए सिरे से कराने की मांग
रांची। झारखंड सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 2025 में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा विवाद अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष दायर याचिका में 19 अप्रैल को आयोजित प्रारंभिक परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से परीक्षा कराने की मांग की गई है।
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याचिका में परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच कराने तथा जांच के लिए एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने की मांग की गई है।

OMR और मूल्यांकन प्रक्रिया के स्वतंत्र ऑडिट की मांग
याचिका में परीक्षा के केवल आयोजन की जांच की मांग नहीं की गई है, बल्कि पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया को जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है। इसमें OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और परिणाम तैयार करने वाली प्रणालियों का स्वतंत्र तकनीकी ऑडिट कराने की मांग शामिल है।
याचिका का उद्देश्य यह पता लगाना बताया गया है कि परीक्षा की प्रक्रिया के किसी भी चरण में ऐसी अनियमितता हुई या नहीं, जिससे अभ्यर्थियों के परिणाम प्रभावित हो सकते हैं।

पहले से जारी है JPSC परीक्षा को लेकर विवाद
14वीं झारखंड सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों का विरोध लगातार जारी है। प्रदर्शनकारी अभ्यर्थी परीक्षा रद्द करने और मामले की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहे हैं। मौजूदा विवाद के बीच मामले की जांच CID स्तर पर भी चल रही है। रिपोर्टों के मुताबिक, प्रारंभिक परीक्षा में सफल करीब 1,000 अभ्यर्थियों ने अपनी OMR शीट की प्रतियां CID को भेजी हैं, जिन्हें मूल OMR से मिलाने की प्रक्रिया की जा रही है।
वहीं, आंदोलनरत छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षा रद्द करने के साथ भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और स्वतंत्र जांच भी शामिल है।

























