JPSC अभ्यर्थी को हाई कोर्ट से नहीं मिली राहत, OMR में रोल नंबर की गलत बबलिंग पर याचिका खारिज

रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा-2025 से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में स्पष्ट किया है कि OMR उत्तर पुस्तिका भरने के नियमों में किसी प्रकार की ढील नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने रोल नंबर की बबलिंग में हुई गलती को केवल “क्लेरिकल एरर” मानने से इनकार करते हुए अभ्यर्थी की याचिका खारिज कर दी।
याचिकाकर्ता ने अदालत से आग्रह किया था कि उसकी OMR शीट का मैन्युअल सत्यापन कर मूल्यांकन कराया जाए। उसका कहना था कि रोल नंबर के एक कॉलम में अनजाने में गलत बबल भर गया था, जिसे उसने तुरंत काटकर सही बबल भर दिया। उसका यह भी तर्क था कि रोल नंबर अंक के रूप में सही लिखा गया था, इसलिए उसकी पहचान आसानी से की जा सकती थी और यदि मूल्यांकन कराया जाता तो वह मुख्य परीक्षा के लिए पात्र हो सकता था।

वहीं, झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) ने अदालत को बताया कि OMR शीट की जांच पूरी तरह कंप्यूटर आधारित प्रणाली से होती है। OMR पर पहले से स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि रोल नंबर या प्रश्न पुस्तिका श्रृंखला (Booklet Series) गलत भरने पर उत्तर पुस्तिका अमान्य मानी जाएगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी अभ्यर्थी की होगी।
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि OMR शीट पर हुई गलती स्वीकार की गई है और इसे केवल मानवीय या क्लेरिकल त्रुटि बताकर नियमों में छूट नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि परीक्षा प्रक्रिया में हजारों अभ्यर्थी शामिल होते हैं और यदि व्यक्तिगत मामलों में राहत दी जाने लगे तो पूरी मूल्यांकन व्यवस्था प्रभावित होगी।
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कोर्ट ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के State of Tamil Nadu v. G. Hemalathaa तथा J&K Board of Professional Entrance Examination v. Pankaj Sharma सहित कई महत्वपूर्ण निर्णयों का हवाला दिया। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि परीक्षा संबंधी निर्देश अनिवार्य होते हैं, उनका पालन करना प्रत्येक अभ्यर्थी की जिम्मेदारी है और हाई कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत भी ऐसे निर्देशों में ढील नहीं दे सकता।
कोर्ट ने यह भी माना कि याचिकाकर्ता द्वारा उद्धृत अन्य फैसलों की परिस्थितियां इस मामले से अलग थीं, इसलिए उनका लाभ इस मामले में नहीं दिया जा सकता।
इन सभी तथ्यों और सुप्रीम कोर्ट की स्थापित विधिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए झारखंड हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। साथ ही लंबित अंतरिम आवेदन भी निष्पादित कर दिए गए।
क्या है फैसले का महत्व?
यह फैसला JPSC सहित सभी OMR आधारित प्रतियोगी परीक्षाओं के अभ्यर्थियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि OMR शीट में रोल नंबर, बुकलेट सीरीज या अन्य अनिवार्य विवरण भरने में की गई त्रुटियों पर बाद में राहत की अपेक्षा नहीं की जा सकती और परीक्षा के निर्देशों का पपालन करना होगा।
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