Three petitions filed in the Jharkhand High Court against the cancellation of various JPSAC-JSSC examinations; hearing likely today.

JSSC-CGL अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, झारखंड हाईकोर्ट ने नियुक्ति रद्द करने का सरकारी आदेश किया निरस्त

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रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय (CGL) परीक्षा को लेकर चल रहे विवाद में सफल अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की ओर से JSSC-CGL परीक्षा और इसके माध्यम से हुई नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया है। अदालत के इस फैसले से उन हजारों अभ्यर्थियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी वर्षों की मेहनत और भविष्य पर सरकार के फैसले के बाद अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे थे। कोर्ट ने यह आदेश दिया है की CID जांच जारी रहेगी। इस मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में हुई थी। परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देते हुए सफल अभ्यर्थियों आकाश गौरव एवं अन्य ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

JSSC-CGL अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, झारखंड हाईकोर्ट ने नियुक्ति रद्द करने का सरकारी आदेश किया निरस्त

क्या था पूरा विवाद?

दरअसल, झारखंड में सरकारी नियुक्ति परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जुलाई-अगस्त 2026 में अभ्यर्थियों का आंदोलन तेज हुआ था। इस दौरान परीक्षा में गड़बड़ी की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई गई थी। आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने सीआईडी जांच में सामने आए तथ्यों का हवाला देते हुए 18 अगस्त 2026 को JSSC-CGL सहित कई भर्ती परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने का निर्णय लिया था।
सरकार के इस फैसले से उन सफल अभ्यर्थियों के सामने भी संकट खड़ा हो गया, जिन्होंने चयन प्रक्रिया पूरी कर ली थी और कई अभ्यर्थी सरकारी सेवा में योगदान भी दे चुके थे।

अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में क्या दलील दी?

सरकार के फैसले को चुनौती देने वाले अभ्यर्थियों का कहना था कि परीक्षा में यदि कुछ लोगों ने अनुचित तरीके अपनाए हैं, तो उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन कुछ लोगों की कथित गड़बड़ी के कारण सभी सफल अभ्यर्थियों का चयन रद्द करना न्यायसंगत नहीं है। याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में यह भी दलील दी गई कि जांच के दौरान संदिग्ध अभ्यर्थियों की पहचान कर उन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। ऐसे में संदिग्ध और निष्पक्ष तरीके से परीक्षा पास करने वाले अभ्यर्थियों को अलग-अलग किया जा सकता है।
अभ्यर्थियों का तर्क था कि पूरी नियुक्ति प्रक्रिया रद्द करने से उन उम्मीदवारों को भी सजा मिलेगी, जिनका किसी प्रकार की अनियमितता से कोई संबंध नहीं है।

JSSC-CGL अभ्यर्थियों को बड़ी राहत, झारखंड हाईकोर्ट ने नियुक्ति रद्द करने का सरकारी आदेश किया निरस्त

सरकार ने परीक्षा रद्द करने के समर्थन में क्या कहा था?

दूसरी ओर, राज्य सरकार ने हाईकोर्ट में अपने फैसले का बचाव किया था। सरकार का कहना था कि सीआईडी जांच में परीक्षा प्रक्रिया के दौरान बड़े पैमाने पर अनियमितताओं, कथित वित्तीय लेन-देन और संगठित तरीके से गड़बड़ी के तथ्य सामने आए हैं।सरकार ने यह भी दलील दी थी कि परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित होने के कारण दोषी और निर्दोष अभ्यर्थियों के बीच अंतर करना मुश्किल है। इसलिए पूरी परीक्षा और उससे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया गया।

हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य से जुड़ा था मामला

JSSC-CGL विवाद केवल एक परीक्षा को रद्द करने तक सीमित नहीं था। इससे हजारों सफल अभ्यर्थियों का रोजगार, भविष्य और सरकारी भर्ती प्रक्रिया पर भरोसा जुड़ा हुआ था। हालांकि, अदालत के आदेश की विस्तृत रिपोर्ट आने पर पूरा आदेश साफ हो पायेगा । फिलहाल हाईकोर्ट के इस फैसले को JSSC-CGL अभ्यर्थियों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें अदालत के विस्तृत आदेश और राज्य सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं। क्या सरकार सुप्रीम कोर्ट जाएगी ?

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