सिमडेगा में केंद्रीय सरना समिति के तत्वावधान में धूमधाम से मनाया गया करम पर्व

सिमडेगा में केंद्रीय सरना समिति के तत्वावधान में धूमधाम से मनाया गया करम पर्व

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शंभू कुमार सिंह

सिमडेगा: सिमडेगा शहर के सरना स्थल में बुधवार को केंद्रीय सरना समिति के तत्वावधान में प्रकृति पूजा का महापर्व करम पूरे विधि-विधान और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उत्साहपूर्वक मनाया गया। इस पर्व का आयोजन करम की डाली लाने के साथ शुरू हुआ, जिसका स्वागत पारंपरिक नृत्य और गीतों के साथ किया गया। इसके बाद केंद्रीय सरना समिति के पदाधिकारी और ग्रामीणजन सामूहिक रूप से सरना स्थल पहुंचे, जहां बाबूलाल उरांव ने विधिवत पूजा-अर्चना कर करम पर्व की शुरुआत की।

पूजा के दौरान ‘महादेव’ और ‘हरि बोल’ के जयघोष के साथ श्रद्धालुओं ने करम पर्व की शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर करम पर्व से जुड़ी पौराणिक कथा भी सुनाई गई, जिसने उपस्थित लोगों में धार्मिक और सांस्कृतिक भावना को और गहरा किया। पूजा के बाद देर रात तक मांदर की थाप और नगाड़ों की गूंज के बीच पारंपरिक झूमर नृत्य का आयोजन हुआ। युवा, महिलाएं और बच्चे पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर नृत्य में उत्साहपूर्वक शामिल हुए, जिससे आयोजन स्थल पर सांस्कृतिक रंगत और धार्मिक आस्था का अनुपम संगम देखने को मिला।

आयोजन में भारी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए और सामूहिक भोज का भी आयोजन किया गया। इस अवसर पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के जिलाध्यक्ष कौशल राज सिंह देव ने अपने संबोधन में कहा, “करम पर्व आदिवासी समाज की आस्था और एकजुटता का प्रतीक है, जो मानव और प्रकृति के अटूट संबंध को दर्शाता है।” वहीं, केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष हरिश्चंद्र भगत ने जोर देकर कहा कि करम पर्व समाज को अपनी परंपरा और संस्कृति से जोड़ता है, और इसे नई पीढ़ी तक पहुंचाना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

आयोजन में केंद्रीय सरना समिति के सचिव विजय उरांव, बाबूलाल उरांव सहित समिति के सभी पदाधिकारी और दूर-दूर से आए जनजातीय समाज के लोग उपस्थित रहे। यह आयोजन न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और सामाजिक एकता का भी प्रतीक बना।

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