करौंदाबेड़ा में तीन शहीद धर्मगुरुओं का शहादत दिवस मनाया गया, लाखों मसीही विश्वासियों ने दी श्रद्धांजलि
शंभू कुमार सिंह
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!सिमडेगा : करौंदाबेड़ा चर्च परिसर में शहीद फादर लौरेंस कुजूर, शहीद फादर जोसेफ डुंगडुंग और शहीद ब्रदर अमर अनूप इंदवार के शहादत दिवस पर भव्य समारोह आयोजित किया गया। इस अवसर पर आर्च बिशप भिनसेंट आइंद के नेतृत्व में मिस्सा बलिदान चढ़ाया गया, जिसमें गुमला बिशप लीनुश पिंगल एक्का, खूंटी बिशप विनय कंडुलना, हजारीबाग बिशप आनंद जोजो सहित दर्जनों पुरोहितों ने सहयोग किया। मिस्सा पूजा के बाद शहीद धर्मगुरुओं को श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
कार्यक्रम में सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा, गुमला विधायक भूषण तिर्की, जिप सदस्य जोसिमा खाखा, गुमला जिला विधायक प्रतिनिधि मनीष हिंदुस्तान, युवा प्रखंड अध्यक्ष रोहित एक्का, प्रतिमा कुजूर, उर्मिला केरकेट्टा, शोभेन तिग्गा, जूली लुगून, सुचिता तिर्की, जिप सदस्य सामरोम पौल तोपनो, 20 सूत्री अध्यक्ष सिलबेस्टर बघवार, प्रखंड अध्यक्ष अजीत लकड़ा, विधायक प्रतिनिधि शीतल एक्का, पंचायत अध्यक्ष संदीप तिग्गा, जिप सदस्य प्रेमा बड़ा सहित लाखों मसीही विश्वासी शामिल हुए।
मुख्य अनुष्ठाता आर्च बिशप भिनसेंट आइंद ने कहा, “शहीदों और संतों में ईश्वर का वास होता है। इन तीन शहीदों की शहादत ने करौंदाबेड़ा की धरती को विशिष्ट पहचान दी है। उनकी शहादत से प्रेरणा लेकर हमें एकजुट रहना चाहिए।”
गुमला बिशप लीनुश पिंगल एक्का ने कहा, “तीन शहीद पुरोहितों के रक्त ने करौंदाबेड़ा की धरती को पवित्र कर दिया है। उनकी शहादत के कारण यह स्थान आज देश-विदेश में जाना जाता है। ये शहीद हमारे लिए प्रेरणा हैं, जिन्होंने इस धरती को धन्य किया।”
सिमडेगा विधायक भूषण बाड़ा ने कहा, “शहीद पुरोहितों का खून ख्रीस्तीय समाज के लिए गेहूं के बीज की तरह है, जो फल देने तक नष्ट नहीं होता। उनकी शहादत के बाद कलीसिया का विस्तार हुआ।” उन्होंने समाज से नशाप Märीति से दूर रहने और एकजुटता बनाए रखने की अपील की। साथ ही, महागठबंधन सरकार की योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया।
गुमला विधायक भूषण तिर्की ने कहा, “कलीसिया के अनुयायियों ने अपने खून से इसे सींचा है, जो आज एक विशाल वृक्ष बन चुका है। हमें असहायों की मदद करनी चाहिए और आदिवासी समाज को एकजुट रहना चाहिए।”
जिप सदस्य जोसिमा खाखा ने कहा, “हमें ईश्वर के प्रति आज्ञाकारी बनना चाहिए। समाज में शिक्षा की कमी के कारण सच्चे चरित्र का निर्माण नहीं हो पा रहा। हमें ऊंच-नीच के भेदभाव से बचकर एकजुट रहना होगा।”

















